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Tuesday, May 7, 2013

MUSKAAN - One more story from JOLLY UNCLE


मुस्कान जौली अंकल स्कूल से आते ही मुस्कान अपना स्कूल बैग एक तरफ रख रोज की तरह मां के गले से लिपट गई। इससे पहले की मां उसके लिए खाना तैयार करती मुस्कान ने मम्मी से पूछा कि यह सैक्स क्या होता है? बच्ची के मुंह से यह अल्फाज सुनते ही मानों मुस्कान की मां के पैरो तले की जमीन खिसक गई हो। आज उसे फिर से मुस्कान के पापा की इस जिद्द पर अफसोस होने लगा कि उन्होने अपनी बेटी को सहशिक्षा स्कूल में क्यूं पढ़ने भेजा? आज यदि हमारी मुस्कान केवल लड़कियों के स्कूल में पढ़ रही होती तो शायद यह दिन देखने को न मिलता। खुद को थोड़ा संभालते हुए उसने अपनी बेटी को कहा कि पहले तुम खाना खा लो, इस विशय में बाद में बात करेगे। खाना खत्म होते ही उत्सुक्तावश मुस्कान ने अपना सवाल मां के सामने रख कर फिर से परेशानी खड़ी कर दी। किसी तरह समझा-बुझा कर मुस्कान की मां ने शाम तक का समय निकाला। जैसे ही मुस्कान के पापा काम से लोटे तो बिना चाय-पानी पूछे अपना सारा दुखड़ा एक ही सांस में उन्हें कह डाला। मुस्कान के पापा ने धीरज से काम लेते हुए बेटी से पूछा कि तुम्हें यह सब कुछ किसने बताया है? मुस्कान ने झट से अपने स्कूल बैग से एक फार्म निकाल कर अपने पापा की और बढ़ाते हुए कहा कि मैंडम ने यह भरने के लिये कहा था। मैने बाकी का सारा फार्म तो भर लिया है, लेकिन एक पंक्ति में सैक्स के बारे में कुछ लिखना है। पिता ने जब ध्यान से फार्म देखा तो हंसते हुए उसे अपनी पत्नी की और बढ़ाया तो उसमें केवल स्त्री या पुरश के बारे में जानकारी मांगी गई थी। मुस्कान के पापा ने अपनी पत्नी की और हंस कर देखते हुए कहा कि खोदा पहाड़ निकली चुहियां। मुस्कान की मम्मी ने चाय के कप के साथ सरकार के शिक्षा विभाग का एक पत्र भी पति को थमा दिया। इस पत्र में शिक्षा विभाग के अधिकारीयों द्वारा सैक्स शिक्षा की जानकारी से जुड़े हर प्रकार के ज्ञान को नई पीढ़ी तक कैसे पहुंचाया जाये इसके बारे में एक लेख लिखने का अनुरोध किया गया था। लेख पंसद आने पर अच्छी रकम का वादा भी किया गया था। एक लेखक होने के नाते मुस्कान के पिता का जीवन भी उस दीपक की तरह था जो खुद अंधेरे में रहते हुए दूसरों को रोषन करता रहता है। यह भी अपनी कलम के माध्यम से समाज को उजाला तो दे रहे थे लेकिन खुद अपना जीवन बहुत ही बुरे हाल में गुजार रहे थे। ऐसे में अच्छी रकम का वादा सुनते ही उन्हे अपने कई अधूरे ख्वाब पूरे होते दिखने लगे। बिना पल भर की देरी किये उन्होने इस विषय पर अपने दिमाग के घोड़े दुड़ाने शुरू कर दिये। मुस्कान के पापा लेखक की हैसयित से इस बात पर गहराई से विचार करने लगे। आज अजादी के 60 बरस बाद भी अभी तक यह क्यूं नही तह कर पा रहे कि बाकी सभी विशयों की तरह इस विशय की जानकारी भी जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग है। हम इस बात को क्यूं भूल जाते है कि शिक्षा और ज्ञान चाहे किसी भी विशय से जुड़े हो उसका एक मात्र सबसे बड़ा लक्ष्य समाज को आत्मनिर्भर बनाना ही होता है। इसी बात को मद्देनजर रखते हुए मुस्कान के पापा ने अपनी कलम के माध्यम से सैक्स शिक्षा से जुड़े हर पहलू को तराशना शुरू किया तो उन्होने पाया कि सैक्स का जाल तो हमारे चारो और फैला हुआ है। समाचार पत्रो से लेकर टेलीविजन सिनेमा और इंटरनेट पर इसकी भरमार है। जैसे ही कलम ने सैक्स शिक्षा पर लिखने का प्रयास शुरू किया तो सबसे पहले उन छोटी बेटियों का ख्याल मन को सताने लगा जो अज्ञानता के चलते नादानी से कच्ची उंम्र में ही भटक जाती है। ऐसे बच्चो के बारे में सोच कर और भी घबराहट होने लगी जो अपने मां-बाप की इकलोती संतान होते हुए भी एच,आई,वी जैसी लाईलाज बीमारी के शिकार है। सारी दुनियां को ज्ञान की रोशनी दिखाने वाला भारत देश इस मामले में इतने गहरे अंधकार में कैसे डूबा हुआ है। इसकी सोच से ही घबराहट होने लगती है। हमारे देश में इस शिक्षा के अभाव में कई बेटियां चाहते हुए भी खुद अपना बचाव नही कर पाती। थोड़ी सी सैक्स शिक्षा भी 11 से 18 साल तक के बच्चो के जीवन में कष्टों को खत्म करते हुए उजालों से भर सकती है। इससे पहले की हमारे फूलों जैसे कोमल किशोर राह भटक कर अंधेरी डगर पर चलने को मजबूर हो जाये, हमे खुशी-खुशी अपनी सोच में बदलाव लाना होगा। स्कूल के अध्यापको को भी यह बात माननी होगी कि विशय चाहे कोई भी हो, ज्ञान के माध्यम से दूसरों को खुशी देना ही सर्वोत्तम दान है। मुस्कान के पिता की परेशानी उस समय और बढ़ गई जब शिक्षा विभाग वालों ने उनके इस लेख को जनहित में देश के अनेक नामी समाचार पत्रो की सुर्खीयां बना डाला। मुस्कान जो आठवी कक्षा में पढ़ती थी उसकी कक्षा के छात्रों ने सैक्स से जुड़े उल्टे सीधे सवाल पूछ कर उसका क्लास में बैठना दूभर कर दिया। हर छात्र एक ही बात कहता था कि किसी को सैक्स के बारे में कोई भी जानकारी लेनी हो तो वो मुस्कान के घर पहुंचे क्योंकि इसके पिता तो सैक्स गुरू है। धीरे-धीरे उसकी सहेलियां भी मुस्कान से कनी काटने लगी। सभी टीचर भी उसे इस तरह से देखने लगे जैसे इस बच्ची ने कोई बहुत बड़ा जुर्म कर दिया हो। इस तरह के माहौल और तानों को सारा दिन सुन-सुन कर मुस्कान इतनी दुखी और असहाय हो गई कि उसने खुदकशी करने का मन बना लिया। ज्ञानी लोगो की बात का विश्वास करे तो यही समझ आता है कि दूसरों को उम्मीदों का रास्ता दिखाने वालों को सदा ही उम्मीदों भरा सवेरा मिलता है। जौली अंकल का मानना है हमारे देश में सदियों से ज्ञान का प्रकाश फैलाने वालो को शुरू में अनेको विपत्तियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में सैक्स शिक्षा जैसा काम तो हर किसी को असंभव ही प्रतीत होगा। लेकिन अपने देश और मानव जगत की सबसे अमूल्य धरोहर लाखो बच्चियों के चेहरो पर यदि सदा हंसी, खुशी और मुस्कान देखनी है तो हम सभी को मिलकर इस नेक कार्य को शुरू करने में अब और अधिक देर नही करनी चहिये।

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