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Friday, April 21, 2017

हस्ताक्षर और व्यक्तित्व विकास - जौली अंकल

हस्ताक्षर और व्यक्तित्व विकास  
हर इंसान के मन यही इच्छा होती हैं कि उसका व्यक्तित्व इतना प्रभावशाली हो कि वो अपनी पहली ही मुलाकात में दूसरों को प्रभावित कर सकें। वो जहा कही भी जायें उसके नाम से ही उसका हर काम हो जायें। लेकिन कई कारणों से असल जिदंगी में यह सब कुछ मुमकिन नही हो पाता। रोजमर्रा की जिदंगी में हमें बहुत सारे लोगों से मिलना-जुलना पड़ता हैं। लेकिन इनमे से कुछ ही खास लोग होते हैं जो पहली बार में ही अपने व्यक्तित्व से दूसरों के दिलों पर अलग छाप छोड़ने में कामयाब हो पाते हैं। वैसे तो व्यक्तित्व को निखारने के लिये बहुत सारी अलग किस्म की तकनीक हैं। लेकिन आपको जानकर हैरानगी होगी कि हम अपनी लिखाई और हस्ताक्षर में थोड़ा सा सुधार कर के अपने व्यक्तित्व को प्रभावशाली बना सकते हैं। हस्ताक्षर का विशेषलण करने की इस वैज्ञानिक तकनीक को ग्राफोलोजी कहा जाता हैं। ग्राफोलोजी दो अक्षरों से मिल कर बना हुआ हैं। पहला हैं ’’ग्राफो’’ जिसके मायने होते हैं कुछ लिखना या बनाना। हम जो कुछ भी लिखते या बनाते हैं उसका एक अलग आकार बनने लगता हैं जिसे आम भाषा में ग्राफ कहा जाता हैं। दूसरा अक्षर हैं ’’लोजी’’ जिसके मायने होते हैं विज्ञान। यह एक ऐसी सरल तकनीक हैं जो हमारी सोच, व्यवहार, सफलता, असफलता और व्यक्तित्व का बारीकी से अध्ययन कर के हमारी कमिया हमारे सामने लाती हैं। 

एक आम इंसान की भाषा में अगर कहा जायें तो हमारे मन और मस्तिष्क से निकलने वाले विचारों से ही हम अपने व्यक्तित्व को निखार सकते हैं। हम बेशक किसी विषय के बारें में कुछ भी सोचते रहें लेकिन लिखते समय हमारी लिखाई में सिर्फ वही सब कुछ देखने को मिलेगा जो कुछ हमारे दिमाग में उस समय चल रहा होता हैं। नतीजतन हमारे सकारात्मक और नकारात्मक विचारों की झलक साफ तौर पर हमारी लिखाई में देखने को मिलती हैं। दूसरी और जैसे-जैसे कोई आदमी उम्र के साथ बड़ा होता हैं उसके हस्ताक्षर में थोड़ा बहुत बदलाव आता रहता हैं। लेकिन यह बदलाव असल में उम्र के बढ़ने से नही बल्कि विचारों और अनुभव के आधार से आता हैं। यह बदलाव कई बार बहुत अच्छा और कई बार नकारात्मक भी हो सकता हैं। ऐसा इसलिये माना जाता हैं क्योंकि हमारे आसपास के महौल से लेकर हमारे दोस्तों, रिश्तेदारों का जो प्रभाव हमारे विचारों पर पड़ता हैं उसी के मुताबिक हमारी लिखावट और व्यक्तित्व बदलने लगता हैं।

इस विज्ञान को अधिकतर देशों में मान्यता मिली हुई हैं। विदेशों में तो बहुत लबें अरसे से इस विषय पर शौध कार्य किये जा रहे हैं। पश्चिमी देश तो इस तकनीक को व्यक्तित्व का सबसे स्टीक विश्लेशण बताने वाला भी मानते हैं। अब इससे भी अहम बात यह हैं इस विज्ञान पर कभी भी किसी प्रकार के ग्रहों और सितारों का कोई प्रभाव नही पड़ता। न ही किसी प्रकार की दशा और दिशा से इसका कोई लेना देना हैं। इसलिये आपको न तो किसी तंत्र-मत्र और न ही अंधविश्वास के चलते घर, दफ्तर के खिड़की दरवाजों को इधर-उधर करने की जरूरत पड़ती हैं। आगे बढ़ने से पहले हमें एक बात को गौर से समझना होगा कि किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व को पहचानने के लिये लिखावट से पहले उसके लिखने के ढंग को बारीकी से समझना आवश्यक होता हैं। हम जिस तरह से लिखते हैं हमारी लिखावट का सीधा संबंध हमारे स्वभाव से होता हैं। ऐसा इसलिये भी कहा जाता हैं क्योंकि हमारी लिखावट कभी भी झूठ नही बोलती। वो हमारे दिलों-दिमाग की हर सच्चाई को साफ-साफ ब्यां कर देती हैं। जैसे की हम किसी व्यक्ति पर किस हद तक भरोसा कर सकते हैं। कोई भी व्यक्ति कितना आत्मविश्वासी हैं या वो हमारा कितना साथ निभा पायेगा। हमारी लिखावट से जुड़ा एक रोचक तथ्य यह भी हैं कि हम अपनी लिखाई को सुधार कर बहुत हद तक अपने कैरियर को सुधार सकते हैं। अनेक देशों के शौधकर्ताओं ने लिखाई के हजारों नमूनों की बारीकी से जांच करने के बाद इस नतीजा निकाला हैं कि दुनिया के सबसे कामयाब कारोबारी, नेता, अभिनेता और अलग-अलग पेशे से जुड़े सभी व्यक्तियों के लिखने का तरीका तकरीबन एक जैसा होता हैं। उनके अक्षरों का आकार, आकृति बहुत हद तक एक दूसरे से मिलती जुलती हैं। विदेशों में अधिकतर लोग किसी भी नये व्यक्ति को नौकरी देने या उसके कारोबार शुरू करने से पहले उसकी लिखाई और हस्ताक्षर का अध्ययन अच्छे से किसी विशेषज्ञ द्वारा करवाते हैं। 

हर व्यक्ति की लिखावट एवं हस्ताक्षर को पहचानने के अनेक पहलू होते हैं। कुछ लोग बिल्कुल सीधा लिखते हैं तो कई लोगों की लिखावट नीचे की और थोड़ी झुकी हुई होती हैं। कई व्यक्ति बहुत ही नरम एवं शांत स्वभाव से और कुछ बहुत तेजी से दबाव बना कर लिखते हैं। इसी तरह कई व्यक्ति हस्ताक्षर इस तरह से करते हैं कि वो दाई और से ऊपर की तरफ उठे होते हैं। किसी भी इंसान के व्यक्तित्व को सही से आंकने के लिये हमें उस व्यक्ति के लिखने के अंदाज, उसकी लिखावट के स्टाईल, दबाव और प्रेशर को भी गौर से देखना चाहिए। इसका मतलब यही होता हैं कि जब हम किसी भी कागज़ पर कुछ लिखते हैं तो उस की छाप का असर कागज के दूसरी तरफ कितना गहरा प्रभाव छोड़ता हैं। जितने अधिक प्रेशर से हम लिखते हैं उतना ही अधिक प्रभाव कागज़ के दूसरी तरफ भी ऊभर कर दिखने लगता हैं। कागज को उल्टा कर के हल्का सा हाथ लगाने से ही इस दबाव को महसूस किया जा सकता हैं। इस दबाव को हाथ लगाते ही हमें यह मालूम पड़ता हैं कि सामने वाले व्यक्ति की लिखाई में कितना मानसिक कसाव हैं। जो बिल्कुल हल्के से लिखते हैं वह लोग बहुत ही सहज और सरल स्वभाव के होते हैं। बहुत दबाव के साथ लिखने वाले लोगों की एक खास खूबी यह होती हैं कि यह जिस चीज को दिल से पसंद करते हैं उसे हमेशा अपने पास रखना चाहते हैं। अपनी सबसे प्यारी चीज को किसी के साथ शेयर करना इन्हें अच्छा नही लगता। हम आपको विश्वास दिलाते हैं कि इस कला को अच्छे से समझने और कुछ समय तक अभ्यास करने के बाद आप भी अपने अनुभव के आधार पर अपने व्यक्तित्व का विकास अच्छे से कर पायेगे। 

जौली अंकल - 9810064112
www.jollyuncle.com

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