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Tuesday, April 13, 2010

जोकर तेरा जवाब नही

मंहगाई और आकाश छूते भाव सुन कर जोकर को डर क्यूं नही लगता? )
गप्पू को जैसे ही दोस्तो से मालूम हुआ कि शहर में नया सर्कस आया हैतो उसने भी अपने दादा से फरमाईश कर डाली कि मुझे भी सर्कस देखने जाना है। दादा ने उसे प्यार से समझाते हुए कहा कि सर्कस तो पुराने जमाने की चीज हो चुकी है। तुम्हारे पास तो कलर टैलीविजनवीडियो गैम्स और इंटरनैट आदि सब कुछ हैतुम सर्कस देख कर क्या करोगेगप्पू भी अपनी जिद्द पर अड़ते हुए बोला कि सर्कस में हाथीघोड़े और बहुत सारे जानवर है। यहां तक कि कुछ सुंदर परियों जैसी लड़कियां चीते के साथ बहुत सारे करतब भी दिखाती है। यह सब कुछ मेरी वीडियों गैंम्स में कहा हैअब दादा जी ने पाला पल्टते हुए कहा कि चलो आज तुम्हारी बात मान ही लेते हैमैने भी बहुत दिन से चीता नही देखातुम्हारे साथ चल कर मैं भी बहुत दिन बाद चीते को देख लूंगा।
सर्कस के कलाकारों द्वारा हैरत-अगेंज कारनामों का घ्यान आते ही हर किसी के मन में बचपन की यादें ताजा हो उठती है। सर्कस के कलाकार चाहे किसी भी देश-धर्म से ताल्लुक रखते होइन सभी का उदेश्य लोगो का मनोरंजन करना ही होता है। बच्चो से लेकर बर्जुगो तक सर्कस में एक चीज जो सबसे अधिक भाती हैवो है सर्कस का जौकर। अपने चेहरे पर अजीबो-गरीब रंग पोत कर और ढीले-ढाले रंग-बिंरगे कपड़े पहने हुए साधारण सा दिखने वाला आदमी जौकर बन कर सभी के आर्कषण का केन्द्र बना रहता है। सारे शो के दौरान जब-जब जौकर महाशय दिखाई देते है तो सर्कस का सारा टैंट बच्चो की तालीयों से गूंजने लगता है। इसी के साथ जौकर की चुलबुली हरकतों से बड़ें-बर्जुगो के चेहरो पर भी खुशी झलकने लगती है। शायद इन्हीं कारणो से ही जौकर सदैव हर किसी का सबसे प्रिय किरदार रहा है।
सर्कस देखने के बाद घर जाते समय सारे रास्ते मन में एक ही विचार बार-बार आ रहा था कि भगवान ने जौकर को कोन सी घुट्टी पिला कर बनाया होगा कि यह हमारे जमाने से लेकर आज बरसो बाद भी हंसता ही चला आ रहा है। क्या इसको गुड़शक्करदाल सब्जी के आकाश छूते भाव सुन कर डर नही लगता। यह जमाने की इतनी बिगड़ी हुई हालात में अपने बच्चों के लिए दूध-दही कैसे जुटा पाता होगाक्या इसके बच्चे इससे यह नही कहते होगे कि मंहगा आटामंहगा पानीदूध तो सारा पी गई शीला नानी। आज जब बड़े से बड़ा भी माई का लाल आटा दाल खरीदने जाता है तो उसका बुरा हाल हो जाता है। हिंदुमुस्लिमसिख ईसाई सभी को तेल घी के दर्शन तक दुर्लभ होते जा रहे है। आम आदमी को तो धीरे-धीरे चावल की शक्ल तक भूलती जा रही है। मंहगाई की यह हालत देख कर अब तो निम्र आय वर्ग के साथ रईस लोगो के भी होश उड़ने लगे है। हर किसी का जीवन नरक बनता जा रहा है। यह कैसा जादू है कि बिजलीपानीगैसपैटोलऔर डीजल की बढती कीमतों को देखकर भी जौकर के चेहरे पर कोई शिक्न तक दिखाई नही देती। ऐसा प्रतीत होता है कि सर्कस का जौकर भी हमारी सरकार की तरह किसी खास मिट्टी से बना हुआ है। दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला नानी से लेकर सोनियां गांधी तक कह रही है मंहगाई घटने का तो सवाल ही पैदा नही होता। देश की जनता चाहे कितना ही माथा क्यूं न पीट लेन जानें मनमोहन सिंह को सोनियां गांधी के अलावा कोई दूसरी आवाज सुनाई क्यूं नही देतीप्रधानमंत्री के हर नये तर्जुबे के साथ गरीब की थाली और छोटी होती जा रही है।
ऐसा सोचना तो सरासर गलत होगा कि जौकर के जीवन में कोई कष्ट या परेशानी नही होतीपरंतु एक आम आदमी की तरह उस पर मंहगाई की मार का कोई असर क्यूं नही दिखाई देतासारी दुनियां के बच्चो को हंसाने वाला जोकर भीआखिर है तो एक साधारण इंसान ही। जौकर भी हमारी तरह समाज का ही एक हिस्सा है। परंतु उसे हर हाल में अपने दर्शको को केवल हंसाना ही होता है। क्योंकि जोकर इस बात को अच्छी तरह से समझता है कि उसका काम सिर्फ हंसना-हंसाना ही है। लेकिन वो कभी भी अपने मुस्कराहते हुए चेहरे के पीछे दबी हुई भावनाओं और गमों की झलक भी अपने चेहरे पर नही आने देता।
जौकर के व्यक्तित्व को देख कर एक बात तो साफ हो जाती है कि रोजमर्रा के जीवन में कितनी ही परेशानीयां क्यूं न हो सदा मुस्कराते रहना ही संतुलित मन की निशानी है। अब प्रश्न यह उठता है कि भगवान राम ने तो अकेले ही हजारों आसुरिक शक्तियों का विध्वंस कर दिया था। क्या आज इस महान भारत की सवा सो करोड़ जनता मिल कर भी मंहगाईभष्टाचार और आंतकवाद जैसे दानव रूपी राक्षसों को खत्म नही कर सकती। यदि जल्द ही फिर से कोई महान क्रान्तिकारी पैदा नही हुऐ तो हम सभी भी का जीवन नर्क बन कर रह जायेगा। सदा खुश रहने वाले जौकर के जीवन से हम और कुछ सीखे या न सीखेपरंतु इतना तो अवश्य समझ सकते है कि यदि कोई आप पर हंसता हैं तो खिन्न न हों क्योंकि कम से कम आप उसे खुशी तो दे रहे हैं। जौकर के सदा खुश रहने का सबसे बड़ा राज यह है कि यदि जीवन में सफलता पानी है तो सदैव अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रखना सीखिए। जौली अंकल दुनियां के इस अद्भूत प्राणी को सलाम करते हुए यही कहते है कि जौकर तेरा जवाब नही। 

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