JOLLY UNCLE's hindi quotes & books

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Wednesday, November 18, 2009

कच्चा - पक्का

बरसों बाद जब मिश्रा जी के घर पोता पैदा हुआ तो उन्होने पूरे मुहल्ले के लिये एक शानदार दावत का आयोजन कर डाला। गली मुहल्ले के बाकी सभी लोगो के साथ वीरू भी दावत का लुत्फ लेने वहां पहुंच गया। पार्टी में वीरू को एक के बाद एक तेजी से पैग चढ़ाते देख उसके खास दोस्त ने उससे कहा कि तुम तो कई दिनों से कह रहे थे, कि तुमने दारू पीना छोड़ दिया है। आज फिर तुम्हें क्या हो गया, कि तुम तो बिना सोचे समझे पैग पर पैग पीये जा रहे हो। वीरू जोकि अब तक नशे में चूर हो चुका था, अपनी लड़खड़ाती आवाज में बोला, यार अभी तो मैने सिर्फ अपने पैसो की पीनी बंद की है, और फिर आज तो इतनी बड़ी खुशी का मौका है, ऐसे में बिना दारू के क्या मजा आयेगा। बात चाहे दारू की हो, बीड़ी-सिगरेट अथवा अन्य किसी नशे की। नशा करने वाले सैकड़ों बार कभी अपनी बीवी-बच्चो, कभी दोस्तो या घरवालों के कहने पर दुबारा नशा न करने की अनगिनत पक्की कसमें खाते है, लेकिन कुछ ही दिनों में सभी कसमें रेत से बनी कच्ची दीवार की तरह ढह जाती है।
ऐसे में जब कभी कोई इन्हें इनके द्वारा खाई हुई कसमों को याद करवाने की गलती करता है तो यह अपना आपा खो कर क्रोधित हो जाते है। उस समय इन्हें इतना भी ध्यान नही रहता कि क्रोध करने से सिर्फ हमारा स्वभाव ही नही बिगड़ता, बल्कि हमारे घर परिवार के साथ और भी बहुत कुछ बिगड़ जाता है। अब बात चाहें कच्चे फल की हो या मिट्टी से बने किसी बर्तन की, जब तब दोनो पक कर तैयार नही हो जाते तब तक कोई भी कद्रदान इनकी और आंख उठा कर भी देखता। मिट्टी के बर्तन बनाने वाला कारीगर चाहे कितना ही खूबसूरत बर्तन क्यूं न बना ले, परन्तु कोई भी समझदार खरीददार उसे उस समय तक उसकी कोई भी कीमत नही देता जब तक वो पक कर तैयार न हो जायें। ठीक इसी तरह जो आदमी अपनी जुबान से तो बड़ी-बड़ी बाते करते है परन्तु वास्तविक जीवन में उनका व्यवाहर बिल्कुल उसके उल्ट होता है, ऐसे लोगो को पीर फकीर कच्चा इंसान कहते है। कच्चे इंसान की छवि भी समाज में कच्चे फल की तरह की तरह ही होती है, जिसे कोई भी पंसद नही करता।
कच्चे लोगो में आत्मविश्वास की कमी के चलते यह पल भर में अपने सहयोगीयों के विचारो के साथ ही अपनी मनोदशा बदल लेते है। कच्चे मन की प्रविृत वाले लोग ढ़ोगी साधू-संतो की लच्छेदार बातो से बहुत जल्द भ्रमिृंत हो जाते है। लेकिन भगवान से पक्के तोर से जुड़ चुके भक्तो के विश्वास को डांवाडौल करना ऐसे पाखडिंयो के लिये मुमकिन नही हो पाता। समाज में रहने वाला कोई भी व्यक्ति इस प्रकार की कच्ची सोच के लोगो के साथ किसी प्रकार का रिश्ता रखना तो दूर उनके ऊपर किसी तरह से भी भरोसा नही कर पाता। भगवान के प्रति कच्ची सोच रखने वाले क्या जाने कि मन को पूर्ण रूप से भगवान के प्रति समर्पित करने से ही उसके करीब पहुंचा जा सकता है।
एक बार जिस इंसान के तार पक्के तौर से भगवान के चरणों से जुड़ जाते है फिर उन्हें भगवान के प्रति आर्कषण की शक्ति लगातार मिलती रहती है। सच्चा भक्त जो भगवान की भक्ति के रस में पूर्ण रूप से पक चुका होता है वो कभी भी छोटे मोटे दुखों से घबरा कर दुखी नही होता। ऐसे भक्तो को यह पक्का विश्वास होता है कि ईश्वर का स्मरण करने से जहां एक और हमारे दुख खत्म होते है वही दूसरी और हमारी शांति व खुशी का खाता बढ़ जाता है और उन्हें भूल जाने से यह खाता घटने लगता है। हर क्षेत्र में सफलता प्राप्ती की तरह भगवान के प्रति अपने कच्चे मन को पक्का बनाने की शुरूआत भी लडखडहाट से ही शुरू होती है परन्तु इससे घबराने की जगह अपने अंदर आत्मविश्वास पैदा करने से ही मंजिल मिल पाती है।
यह सच है कि धर्म की राह पर चलते हुए हमें कई बार भरसक प्रयत्न करने पर भी सफलता नहीं मिलती तो ऐसे में हमें सम्पूर्ण विश्वास रखते हुए उस कार्य का फल परमात्मा पर छोड़ देना चहिये। विद्वान लोग तो सदा ही एक बात कहते है कि ईमानदारी और परिश्रम के फल को पकने में जरूर थोड़ा वक्त लगता है, परंतु जब पक कर तैयार होता है तो वो बहुत ही मीठा होता है। पूर्ण विश्वास और पक्के मन वाले यह अच्छी तरह से जानते है कि आत्मविश्वास का अर्थ होता है, अपने काम में अटूट श्रद्वा। अब यदि आप अपना हर कार्य कच्चे मन से करने की बजाए पूरी लगन और खुशी से करना शुरू कर दे तो आपको कोई भी कार्य मुश्किल नही लगेगा। किसी भी महान कार्य को अंजाम देने के लिए आधे-अधूरे मन से करने की बजाए उंमग-उत्साह को सदैव अपना साथी बनाइये, फिर आप पायेगे कि किसी भी कार्य में सफलता पाने से आपको कोई नही रोक सकता।
कच्ची पक्की बातो की बात लिखते हुए जौली अंकल की कलम यही कहना चाह रही है कि ऐसा लिखने का क्या फायदा जो हर किसी को झूठा लगे। अब यदि आप अपने सभी दुखों परेशानीओ से छुटकारा पाना चाहते है तो सच्चे मन से परमात्मा के साथ जुड़ने का प्रयत्न करे क्योकि किसी अन्य को दिल देने से आपका दिल टूट सकता है, किन्तु परमात्मा को दिल देने से आपका दिल कच्चा नही बल्कि और अधिक मजबूत एवं पक्का होता है।   

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