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Wednesday, November 18, 2009

हम जा कहां रहें है

समय कभी किसी के लिये न रूका है न ही दुनियां की कोई ताकत उसे कभी रोक पाई है। समय के साथ-साथ जहां युग बदलते रहे है, वहीं इंसान की जिंदगी में भी तेजी से बदलाव आया है। यह तो हम सभी जानते है कि जानवरों के जीवन में किसी युग का कोई महत्व नही होता। हजारों साल पहले भी गाय घास और शेर मांस खाता था, आज भी उनका जीवन वैसा ही चल रहा है। उन्हें उस समय भी अपने किसी रिश्ते की समझ नही थी, आज भी वो इस बारे में अनजान है। लाख कोशिशों के बावजूद भी इंसान जानवरों के जीवन में किसी प्रकार का कोई बदलाव नही ला सका। लेकिन इस लंबे सफर के दौरान इंसान के अपने जीवन में बहुत कुछ बदल गया है। क्या कभी किसी ने इस भागती-दौडती जिंदगी में एक पल रूक कर यह सोचने का प्रयास किया है कि आखिर हम जा कहां रहे है? पुराने युगो को यदि छोड़ भी दे और कुछ दशको पहले की बात को ही याद करे तो हर तथ्य यही कहता है कि उस दौर में आपसी भाईचारे और ईश्वर के प्रति प्यार में कोई कमी कही दिखाई नही देती थी। अपने नजदीकी तो क्या दूर वाले मित्र, रिश्तेदार भी हर मुश्किल घड़ी में सदा एक दूसरे का साथ निभाते थे। अतीत के भरोखे में झांकने का प्रयास करे तो एक ही बात खुल कर सामने आती है कि जैसे ही कोई मदद के लिये भगवान की तरफ एक बार देखता था, उसी समय वो कोई न कोई जरियां बना कर अनेको हाथ उस दुख को बांटने के लिये भेज देता था।
हर युग की तरह आज भी फूलों की कोमल बेल तो अपने आस-पास किसी पेड़ को सहारा बना कर खुद को मौसम की हर मार से बचा लेती है, परन्तु कहने को इंसान जो आज तरक्की और समझदारी के शिखर पर पहुंच चुका है उसे अपने सगे रिश्तेदारों पर तो क्या अपनी परछाई पर भी भरोसा नही रहा। भगवान न करे कि किसी इंसान के ऊपर कोई दुख या मुसीबत आ जाये ंतो ऐसे में लाख ढूंढने पर भी ऐसा एक कंधा भी दिखाई नही देता, जिसे हम अपना मानते हुए उस पर सिर रख कर अपने गम को हल्का कर सके। कुछ अरसां पहले तक दोस्तो-यारों की महफिल में जहां हर समय कहकहे ही गूंजते थे आज एक बीते युग की बात लगती है। तरक्की के इस दौर में दोस्त, रिश्तेदार तो क्या अपना साया भी न जानें कब किस को धोखा दे कर अंधकार की खाई में धकेल दे यह कोई नही जानता। हर रिश्ते, गली मुहल्ले के हर कोने से धोखे और छलकपट की बदबू आने लगी है। जिन दोस्तो को देखते ही चेहरे पर हंसी और मुस्कराहट आ जाती थी, आज वही लोग हर समय खून के आंसू रूलाने के लिये तैयार रहते है।
जिंदगी के इस मोड़ पर दूसरो को परेशानी में देख कर हंसने वालों की तो आज इस दुनियां में कोई कमी नही है। अफसोस तो सिर्फ इस बात का है कि दुख के समय हमें अपने आंसू पोछने वाला दूर-दूर तक खुदा का कोई नेक बंदा दिखाई नही देता। अब चाहे कोई हमारा कितना भी सगा क्यूं न हो कुछ समय तक तो वो हमारा साथ निभाने का ढ़ोंग जरूर करते है, लेकिन असल में जो हर पल हमारा साथ निभाता है, उसे हम भूल कर हम उससे दूर होते जा रहे है। जब भगवान आपके साथ होता है, तो इसके यह मायने कदि्प नही होते कि आपको कभी भी आंधी और तुफान का सामना नही करना पडेगा, बल्कि इस का मतलब यह होता है कि कोई भी तुफान आपकी किश्ती को डुबो नही सकता। जब कभी कोई इस प्रकार की अच्छी और ज्ञान की बात हमें समझाने का प्रयास करता है, तो हम अपनी सभी कमियां और दोष भगवान के ऊपर छोड़ कर अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश करते है।
न जाने इंसान की इस तरक्की को क्या कहा जायें कि प्रभु से मांगने के लिए तो हमें हाथ उठाने में खुशी और गर्व महसूस होता है, जबकि किसी गरीब, लाचार की भलाई करने के लिए हमें अपना हाथ आगे बढ़ाने में शर्म लगने लगती है। अब तक तो समय आपको बदलता रहा है अब आप समय के साथ अपने स्वभाव को बदलते हुए खुद को संतों और वृक्ष जैसा बनाने का प्रयास करो, क्योंकि इन दोनो की नियति पीड़ा सह कर भी दूसरो को फल देने की है। भगवान हमारा सबसे अच्छा एक दोस्त जो न केवल हर सुख दुख में हमारा साथ निभाता है बल्कि हर क्षण हमारे संग-संग भी रहता है। उसकी और से मुख मोड़ने की बजाए हमें दोस्ती का हाथ बढ़ाना होगा। यह तो हर कोई मानता है कि जिंदगी में हर छोटे-बड़े तोहफों में सबसे महान तोहफा दोस्ती और प्यार का है। एक बार सच्चे मन से भगवान के लिए दोस्ती की तड़प पैदा कर के देखो, फिर आप पाओगे कि वो आपके लिये क्या-क्या कर सकता है? आज के इस दौर में सवाल पानी का नही प्यास का हैं, सवाल मौत का नहीं सांस का है, दोस्त तो दुनिया में है बहुत मगर सवाल दोस्ती का नहीं विश्वास का है।
जमाने के इस बदलते दौर में हर व्यक्ति रिश्तो की इन भूल-भुलैयां में खोया हुआ है। अक्सर हम सभी को यही शिकायत रहती है कि भगवान की राह पर चलने के लिये भक्ति का समय कहां है? भगवान को याद करने का सबसे बढ़िया तरीका यही है कि हम उसे याद करने की आदत या शौंक बना ले। यह बात तो हर कोई मानता है कि आदत अच्छी हो या बुरी एक बार लगने पर वो कभी छूटती नही। आप हर समय अपने सभी रोजमर्रा के कार्य करते हुए भगवान के बारे में सोच विचार शुरू कर दे फिर आपकी यही आदत दुनियां के झूठे रिश्तो से आपको अलग करके आपके जीवन का रूख भगवान की और मोड़ देगी और उसी पल भगवान आपको प्राप्त हो जायेगे। परन्तु हम अक्सर इसका उल्टा करते है। हम भगवान को याद करते समय भी अपना ध्यान अन्य कामों में लगाऐ रहते है। जौली अंकल के मन से तो यही आवाज आ रही है कि अभी भी न तो देर हुई है और न ही कुछ बिगड़ा है, आप एक बार अपने पवित्र मन से यह तो सोचो कि हमें जाना कहां था और हम जा कहां रहे है, आपको अपनी मंजिल साफ दिखाई देने लगेगी, क्योंकि दु:खों से भरी इस दुनिया में सच्चे प्रेम की एक बूंद भी मरूस्थल में सागर की तरह होती है।

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