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शनिवार, 13 मार्च 2010

ओवर टाईम


शाम होते ही गप्पू के सभी दोस्त अपने मम्मी पापा के साथ बाजार घूमने-फिरने या कोई फिल्म देखने निकल जाते। गप्पू अपने मां-बाप की इकलोती संतान होने के कारण बिल्कुल अकेला और उदास सा अपने पापा मम्मी के इंन्तजार में घर में बैठा रहता। वो कभी भी अपने पापा के साथ घूमने नही गया था। जब कभी गप्पू के दोस्त उससे किसी फिल्म या होटल में खाने के बारे में जिक्र करते हो उसका मन बहुत ही बैचेन सा हो जाता था। उसके मन में रह-रह कर एक ही सवाल बार-बार उठता कि उसके पापा कभी भी न तो उसे घुमाने ले जाते है और न ही उसके साथ खेलते है। मुहल्ले के बाकी सभी लोगो की तरह समय पर घर क्यूं नही आते? मेरे पापा ही सदा देरी से क्यूं आते है, और न ही उसे अपना समय देते है। आज चाहे कुछ भी हो जायें मैं पापा के आने तक उनका इंन्तजार करूगा और दफतर से रोज देरी से आने का कारण भी जरूर पूंछूगा।
काफी रात बीत जाने के बाद जब गप्पू के पापा घर आये तो गप्पू ने अपने दिल की सारी बात उनसे कह डाली। पहले तो उसके पापा ने उसे प्यार से टालने का विफल प्रयास किया, परन्तु जब वो अपनी हठ पर अड़ा रहा तो उसके पापा ने उसे समझाया कि हमनें अपने घर और कार के लिये बैंक से बहुत सा पैसा कर्ज पर लिया हुआ है। उसकी किश्ते देने के लिये मुझे दफतर में रोज औेवर-टाईम करना पड़ता है। पापा यह औवर टाईम क्या होता है? उसने जोश-जोश में अपने पापा से पूछा। अब तक गप्पू का मूड काफी ठीक हो चुका था। जवाब में उसके पापा ने उसे समझाया कि नियमित समय से अतिरिक्त कार्यकाल में जो काम किया जाए उसे ओवर टाईम कहते है। इस काम से जो पैसे मुझे मिलते है उनसे मैं बैंक की किश्ते चुका पाता  हूँ।
अब गप्पू ने पूछा कि एक दिन ओवर टाईम करने से आपको कितने पैसे मिल जाते है? गप्पू के पापा ने कहा मुझे एक दिन औवर टाईम करने से 300 रूप्ये मिल जाते है। कुछ देर सोचने के बाद गप्पू ने अपने पापा से कहा कि आप इतने सारे पैसे कमाते हो, लेकिन आपने मुझे तो कभी कुछ पैसे नही दिये। गप्पू के पापा ने खुशी-खुशी झट से गप्पू को 20 रूप्ये दे दिये। कुछ दिन बाद गप्पू ने फिर इसी तरह अपने पापा से पैसे मांगे तो उन्होनें पूछा कि वो इन पैसो का क्या करेगा? गप्पू ने कहा कि मैं यह सारे पैसे अपनी छोटी सी गुलक में जमा कर रहा  हूँ, मुझे एक बहुत ही जरूरी चीज खरीदनी है। उसके पापा को गप्पू की यह बचत करने की आदत अच्छी लगी और वो रोज ही उसे कभी 5 कभी 10 रूप्ये देने लगे।
एक दिन सुबह जब गप्पू के पापा दफतर जाने लगे तो उसने बड़े ही प्यार से कहा कि क्या आप आज शाम को दफतर से थोड़ा जल्दी घर आ सकते हो? उसके पापा ने कहा कि मैने कुछ दिन पहले ही तुम्हें अच्छी तरह से समझाया था कि मुझे दफतर में ओवर टाईम के लिये रूकना पड़ता है। गप्पू ने कहा कि पापा आज मेरा जन्मदिन है, मैने अपने कुछ दोस्तो को घर पर बुलाया है। क्या आप एक दिन के लिये भी औवर टाईम नही छोड़ सकते? जब उसके पापा ने फिर से अपनी मजबूरी बतानी शुरू की तो उनकी बात को बीच में अनसुना सा करके गप्पू दौड़ कर अपने कमरे में गया और अपना पिगी बैंक उठा लाया। उसने उसमें से सारे पैसे निकाल कर पापा के सामने ढेरी कर दिये और बोला कि उस दिन मैने आपको कहा था कि मुझे एक बहुत ही जरूरी चीज खरीदनी है। मैने यह सारे पैसे आज के दिन आपका ओवर टाईम खरीदने के लिये इक्ट्ठे किये है। यह पूरे 300 रूप्ये है। आप यह सारे पैसे ले लो, लेकिन आप आज एक दिन के लिये अपना औवर टाईम छोड़ दो। एक दिन यदि ओवर टाईम नही करोगे तो कुछ नही होगा, मुझे आज अपना जन्मदिन आपके साथ मनाना है। पापा आज मैं अकेला नही रहना चाहता, अपनी यह बात कहते-कहते गप्पू फूट-फूट कर रोने लगा।
मासूम बच्चे के प्यार का यह नजारा देख गप्पू के पापा के उसकी मम्मी की आंखों में से भी गंगा-जमुना बहने लगी थी। हम सभी जानते है कि परिवार के लिये सुख-सुविधाऐ जुटाने के लिये मेहनत करना बहुत अच्छी बात है। जौली अंकल का तर्जुबा तो यही कहता है कि जो कुछ आपके भाग्य में है उसे दुनियॉ की कोई भी शक्ति आपसे छीन नही सकती और जो कुछ आपके भाग्य में नही है उसे दुनियॉ की कोई भी शकित आपको दे नही सकती। ऐसे में पैसा कमाने की होड़ में बच्चो की छोटी-छोटी खुशीयॉ की कुर्बानी देना बच्चो के साथ बहुत बड़ी नाइंसाफी होगी। 

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