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Saturday, March 13, 2010

जूतो का जलवा

बचपन से हम सभी एक कहावत सुनते आऐ है कि कई बार लोगो की किस्मत एक पल में बदल जाती है, क्योंकि ऊपर वाला जब कभी मेहरबान होकर किसी को कुछ भी देता है तो छप्पड़ फाड़ कर देता है। शायद इसी कहावत से प्रभावित होकर टी.वी. वालों ने हिन्दुस्तान के महशुर फिल्मी कलाकार सलमान खान के साथ मिल कर एक गेम शो शुरू किया था जिसका नाम था 10 का दम। इस शो में जीतने वाले को 10 करोड़ रूप्ये का नकद ईनाम दिया जाता था। अंक 10 में कितना दम हो सकता है, इस बात का अंदाजा आपने कभी सपने में भी नही लगाया होगा। अब आप सोच रहे होगे कि मैं कौन से 10 नंबर के अंक की बात कहना चाहता  हूँ।
इस बात से पर्दा उठाने से पहले विद्वान लोगो की एक और बात पर गौर करना जरूरी है। वो अक्सर कहते है कि पारस नामक पथ्थर के छूने से लोहा भी सोना बन जाता है। लेकिन आज तक दुनियॉ में किसी ने भी ऐसा कोई करशिमा नही देखा होगा कि किसी इंसान के छूने से एक साधारण से 10 नंबर के चमड़े के जूते की कीमत एक करोड़ डालर से भी अधिक हो गई हो। इससे बड़ा चमत्कार तो दुनियॉ में शायद हो ही नही सकता। न जानें यह जूता किस शुभ घड़ी में बना था जो आज यह सारी दुनियॉ में गजब ढ़ा रहा है। इसी के साथ जिस पत्रकार को आज तक कोई जानता नही था, आज इस जूते की बदोलत दुनियॉ के हर घर में उस का चर्चा हो रहा है। इस जूते के सामने तो सोने-चांदी तक की चमक फीकी दिखने लगी है।
अब तो पूरी दुनियॉ इस बात से वाकिफ है कि एक इराकी पत्रकार मुंतजर अल-जैदी ने एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान अमरीकी राष्ट्रपति जार्ज डब्लयू बुश जो की इस गद्दी पर चंद दिनो के मेहमान है उन पर जूते फैंक कर उनका स्वागत किया। ऐसे जूतों को खरीदने के लिये ईराक के लोग एक करोड़ अमरीकी डालर से अधिक की कीमत देने को तैयार है। कुछ लोग अपनी बेटी को रिश्ता और कुछ उसे एक बढ़िया सा घर देने को तैयार हो गये है। अभी तो यह जूता बुश साहब के नजदीक से ही निकला था, अगर यह जूता उनके सिर को छू जाता तो फिर सोचिए कि ऐसे जूतो की कीमत दुनियॉ वाले शायद 100 करोड़ डालर तक लगा देते।
यदि इसी प्रकार के 8-10 जूते ईराकीयों के हाथ और लग जाऐ तो वो बहुत ही आसानी से विश्व बैंक को कर्जा दे सकते है। अमरीका के 100-100 साल पुराने बैंक जो पैसे की कमी के कारण आऐ दिन ताश के पत्तो की तरह ढ़हते जा रहे है, उन्हें इस प्रकार के जूतो की मदद लेकर डूबने से बचाया जा सकता है। बाकी देश भी अगर चाहे तो वो भी इस तरह के तरीको से अपने-अपने देश को पैसे की कमी से उभरने में बहुत बड़ी राहत दिला सकते है। इधर दुनियॉ के सबसे ताकतवर शहनशाह के सिर में जूतो की बरसात हो रही थी, तो उधर मौके का भरपूर फायदा उठाते हुए वीडियो गैंम्स बनाने वाली कम्पनीयों ने जूतो के इस खेल से जुड़ी अनेक वीडियो गैंम्स कुछ ही घंटो में ही बाजार में उतार दी। अब दुनियॉ भर के बच्चे बुश साहब के परेशान चेहरे पर जूते मार कर इस मजेदार खेल का आंन्नद ले रहे है, और वीडियों कम्पनी वाले मोटा मुनाफा कमा रहे है।
दुनियॉ भर के लेखक और पत्रकार अभी तक यही मानते आऐ है कि कलम में बहुत ताकत होती है। इतिहास में अनेको ऐसे प्रमाण है कि लेखक की लेखनी के कारण दुनियॉ में कई क्रंांतियॉ कामयाब हुई है और क्रुर राजाओं को अपना सिंहासन तक छोड़ना पड़ा है। परन्तु कई ऐसे मौके होते हैं, जब पत्रकार चुप रहकर ही अपने पेशे की सही सेवा कर सकते है। बहुत अधिक बोलने की बजाए दो शब्दो का जवाब भी महत्वपूर्ण हो सकता है, जिसे मौन कहते हैं। लेकिन यह भी सच है कि अधिकाश: लेखको को कभी भी किसी पारखी नजर ने न तो ठीक से आंकने की कोशिश की है और न ही उन्हें समाज में उचित स्थान दिया। इसका मतलब यह नही कि मैं इराकी पत्रकार के गुस्से को जायज ठहरा रहा  हूँ। पत्रकार किसी भी दशा में हो, उसे कभी भी अपना आपा नही खोना चाहिये। वो चाहें तो हर स्थिति में लेखनी के माघ्यम से अपने भावों का कारगर और प्रभावी ढंग से इजहार करते हुए तोपो का मुंह मोड़ सकता है। अब यदि पढ़े-लिखे लोग भी अच्छा व्यवहार नही करेगे तो हर कोई यही कहेगा कि उसकी सारी शिक्षा बेकार है।
इन जादुई जूतो के जलवों के बारे में यह रोचक लेख लिखते समय जौली अंकल के मन में भी खुशी के लव्ू फूट रहे है कि शायद भगवान एक बार फिर कोई चमत्कार दिखा दे। हम जूतो के साथ खिलवाड़ तो नही कर सकते लेकिन यह उम्मीद जरूर रखते है कि इस लेख के जरिये करोड़ो न सही लाखो ही दिलवा दे। 

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