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Saturday, March 13, 2010

पापा, आई लव यू


गुनगुन अपने घर के आंगन में अपनी कुछ छोठी-छोटी सहेलीयों के साथ खेल रही थी, कि अचानक उसके घर के सामने एक चमचमाती हुई कार आ कर रूकी। गुनगुन अपना खेल छोड़ कर उस कार को हसरत भरी निगाहो से देखने लगी। यह कार उनके पड़ोसी अभी-अभी खरीद कर लाए थे। गुनगुन दौड़ते हुए अपनी मम्मी को यह खबर बताने के लिये घर के अंन्दर भागी और अपनी मम्मी से पूछने लगी कि मम्मी हम अपनी कार कब लेगे? हमारे पड़ोसीयो के पास तो पहले से ही दो कारे है। आखिर मेरे पापा कार क्यूं नही खरीदते?
गुनगुन की मां को समझ नही आ रहा था कि वो उसको अपनी मजबूरी और लाचारी अपनी गुड़ियॉ जैसी लाडली को कैसे बताऐ कि इस कमर तोड़ मंहगाई में उसके पिता की कमाई से तो घर का भरण-पोषण करने के बाद मुश्किल से तो हम स्कूटर चलाने का खर्चा निकल पाते है। ऐसे हालात में हम लोग कार लेने की कैसे सोच सकते है? अपने गम और आंसूओ को छिपाते हुए उसकी मां ने उसे समझाया कि हमारी सभी जरूरते भगवान जी पूरी करते है। तुम भी रोज सुबह उठ कर भगवान से प्रार्थना किया करो, वो तुम्हें भी बहुत जल्द सुन्दर सी कार ले देगे। गुनगुन के दिल को यह बात छू गई, उसने अपनी मां से कहा कि अब वो रोज भगवान से ही प्रार्थना किया करेगी कि हमें भी एक सुन्दर सी कार दिलवा दो।
कुदरत का करशिमा कहिए या बच्चे के कोमल मन से निकली हुई भगवान के चरणों में प्रार्थना का असर, चंद ही दिनों में गुनगुन के पापा को दफतर से बहुत लंम्बे अरसे से रूकी हुई एक मोटी रकम का बकाया चैक मिल गया। पति-पत्नी ने आपस में सलाह करके अपनी इकलोती बिटियॉ के ख्वाब को पूरा करने की कोशिश में कुछ रकम बैंक से कर्ज के रूप में ले ली। चंद ही दिनों बाद वो भी बिटियॉ की मन-पसंन्द लाल रंग की चमचमाती हुई कार अपने घर ले आये।
घर पहुंचते ही वो दोनो भगवान का शुक्रीयॉ अदा करने के लिये पूजा करने में जुट गये। गुनगुन कार की चाबी लेकर खेलते-खेलते कार के पास चली गई। कुछ देर बाद जब वो पूजा खत्म करके बाहर आये तो गुनगुन के पापा ने देखा कि गुनगुन नई नवेली दुलहन की तरह खूबसूरत कार के ऊपर कुछ टेढ़ी-सीधी लाईने खींच कर उसे खुरच रही थी। यह सब देखते ही वो आग बबूला हो उठे। वो अपने गुस्से पर काबू न रख पाये, उन्होने आव देखा न ताव, गुनगुन के ऊपर थप्पड़ो की बरसात कर दी। उस समय वह यह भी भूल गये कि जब आदमी क्रोधित होता हैं तो बहुत सारी शक्ति नष्ट हो जाती है, अत: हमें शक्ति का प्रयोग बुद्विमता से करना चहिये। फूल जी नाजुक और कोमल गुनगुन अपने पापा की मार से इतनी सहम गई कि रोते-बिलखते हुए घर के कोने में जाकर सो गई। घर के बाकी सदस्यों ने भी नई कार की खुशी तो क्या मनानी थी सभी बुझे हुए दुखी मन से बिना कुछ खाये-पीये ही सो गये।
अगले दिन सुबह जब गुनगुन के पापा दफतर जाने लगे, तो उन्होने अपनी बेटी गुनगुन ध्दारा कार के ऊपर खींची हुई उन ढेड़ी-सीधी लाईनो को कम करने के प्रयास से उन्हें एक कपड़े से उन्हें मिटाने का प्रयास किया। इसी दौरान उन्होने ध्यान से उन लकीरो को देखा तो उनकी आंखो से अश्रू धारा बह निकली। वो अपने आप को कोसने लगे कि मैंने रात को बिना सोचे समझे उस बच्ची की इतनी पिटाई क्यूं की? अपने पति को इस तरह से फूट-फूट कर रोते देख गुनगुन की मम्मी बाहर आई और पति से परेशानी का कारण जानना चाहा, तो उसके पापा ने बिना एक भी अक्षर बोले कार की तरफ इशारा कर दिया। चाबी से रगड-रगड़ क़र ढेड़ी-सीधी लाईनो से गुनगुन ने लिखा था - 'पापा, आई लव यू'
मौका चाहे कोई भी हो, हमारे प्यारे मासूम बच्चे भी अपने मन की भावना को व्यक्त करना चाहते है, लेकिन नासमझी के कारण कई बार उनकी बात कहने का तरीका थोड़ा गलत हो जाता है। किसी बच्चे को उसकी गलती पर कोई प्रतिक्रिया या सजा देने से पहले हमें एक बार जरूर सोचना चहिये कि आखिर उनके मन की मंन्शा क्या है? जौली अंकल का तर्जुबा तो यही कहता है कि फूलो की तरह कोमल हृदय के बच्चे कभी किसी का बुरा करने के बारे में तो सोच ही नही सकते। वो तो अपनी हर छोटी सी खुशी और इच्छा पूर्ति पर केवल इतना ही कहना जानते है कि - पापा, आई लव यू। 

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