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Saturday, February 13, 2010

फारेन रिटर्न्ड

आजकल आप किसी भी दफतर में फोन लगाऐं तो पहले की तरह किसी मधुर भाषी स्वागती कन्या की आवाज की जगह कम्पयूटर की झनझहाट भरी आवाज सुनाई देती है। कुछ दिन पहले एक सज्जन ने शादी ब्यूरों में कुछ जानकारी लेने के लिये फोन लगाया तो उधर से आवाज आई कि रिश्ते की बात करने के लिये कृप्या एक दबाऐं, सगाई से जुड़ी बातचीते के लिये दो दबाऐं, शादी की जानकारी के लिये तीन दबाऐ। उस मनचले ने मजाक में कह दिया यदि दूसरी शादी करनी हो तो क्या दबाऐ? झट से कम्पूयटर ने जवाब दिया कि उसके लिये आप अपनी पहली बीवी का गला दबाऐं। बाकी सभी दलालों की तरह शादी के यह दलाल भी अपने काम में इतने माहिर होते है कि एक बार कोई इनकी गली से गुजर जाऐ तो यह तब तक उसका पीछा नही छोड़ते जब तक शादी का ढोल उसके गले में न डाल दे। फिर वो चाहे लाख कोशिश कर कर ले उसे हर हाल में यह ढ़ोल बजाना ही पड़ता है।
देसी दुल्हों के मुकाबले फारेन रिटर्न्ड दुल्हों की हमारे देश में सदा से भारी मांग रही है। विदेशी दुल्हा चाहें उंम्र के किसी भी पढ़ाव का हो, विदेश से लौटते ही उसका स्वागत फूल मालाओं के साथ-साथ ढ़ोल धमाको के साथ किया जाता है। गांव के अधिकांश लोग अपने सभी जरूरी काम काज छोड़ कर उस फारेन रिटर्न्ड के स्वागत की तैयारीयों में लग जाते है। किसी न किसी स्वार्थ के चलते हर कोई फारेन रिटर्न्ड लोगो को भरपूर प्यार का दिखावा करते हुए सच्चा हितेषी साबित करने में कोई कसर नही छोड़ता। वहीं दूसरी और उनके सामने अपनी सुदर, सुशील और हर तरह से योग्य लड़की का रिश्ता करने वालों की एक लंबी कतार लग जाती है।
चंद डालरों की कमाई और अग्रेजी दारू के लालच में ऐसे लोगो का काम हमारे यहां रिश्तो की दलाली करने वाले और भी आसान कर देते है। शादी से जुड़े हर प्रकार के सामान के साथ यह लोग रिश्तेदारो का भी किराये पर मंगवाने का इंतजाम कर देते है। यदि कोई मां-बाप कभी गलती से लड़के की योग्यता, आमदनी या घर-बाहर के बारे में कुछ पूछ ले तो शादी करवाने में निपुण दलाल हर सवाल का एक ही जवाब देते है कि आप कमाल कर रहे हो। लड़का फारेन रिटर्न्ड है, और आप न जाने किस प्रकार के वहमों में पड़ते जा रहे हो। अगर आप को लड़के की काबलियत पर कोई शक है, तो आप यह रिश्ता रहने ही दो। मैने तो आपको बिल्कुल अपना समझ कर आपके भले की सोची थी। ऐसी चंद उल्टी-सीधी बातों में लड़की वालों को उलझा कर यह दलाल लोग होटल में दरबान की नौकरी करने वाले को उस होटल का मालिक बना कर रिश्ता पक्का करवा कर ही दम लेते है।
आज अग्रेजों को भारत छोड़े एक जमाना हो चुका है। न जानें फिर भी हमारे यहां टैक्सी ड्राईवर से लेकर फाईव स्टार होटल के कर्मचारी तक अधिकतर लोग आज भी गोरी चमड़ी वालो को देखते ही सर-सर कहते हुए उनके आगे पीछे दुम क्यों हिलाने लग जाते है? गोरी चमड़ी वाला कहां से आया है, उसका उस देश में क्या रूतबा है, इसके बारे में विस्तार से जानकारी हासिल करना तो दूर हम उसके मां-बाप और रिश्तेदारों के बारे में जानने तक की कोशिश नही करते। गोरे लोगो की बात तो छोड़ो यदि हमारे गांव का कोई व्यक्ति चार-छह महीने विदेश के किसी होटल में सफाई कर्मचारी या कोई अन्य छोटी सी नौकरी भी कर के जब देश वापिस लौटता है तो हम लोग झट से उसके नाम के साथ फारेन रिटर्न्ड का तगमा लगा कर उसे सातवें आसमान पर बिठा देते है। फारेन रिटर्न्ड के इस तगमें में न जाने क्या जादू होता है कि यह तगमा अपने देश में अच्छे से अच्छे पढ़े लिखे लोगो की डिग्रीयों से कहीं अधिक भारी और चमकदार होता है। फारेन रिटर्न्ड तगमें की चमक इतनी चमकीली होती है कि हमें उसके चकाचौंध के आगे कुछ दिखाई ही नही देता। हम लोग आपस में चाहे सारा दिन गाली गलौच करते रहे, लेकिन फारेन रिटर्न्ड लोगो के सामने हर कोई बड़ी ही संजदीगी से पेश आता है। अब यदि फारेन रिटर्न्ड का ताल्लुक किसी गांव से है, तो सोने पर सुहागे वाली कहावत अपनी चमक पूरी तरह से दिखाने लगती है।
जरा गौर से जमाने की हवा के रूख को देखे तो समझ आता है कि अब फिजा बदल रही है। दुनियां में सबसे ताकतवर देश के राष्ट्रपति न सिर्फ हमारे देश के प्रधानमंत्री से लेकर साधारण बच्चो की तारीफ कर रहे है बल्कि दबी जुबान से अपने देश के बच्चो को भारत के मुकाबले पिछड़े होने की चेतावनी भी दे रहे है। समझदार लोग तो इशारों-इशारों में यही समझाते है कि किसी विषय के बारे में पूरी जानकारी न होने से अधिक शर्म की बात यह होती है कि उस बारे में पूरी जानकारी न लेना। समय की मांग है कि हम अपने अतीत को भूल कर यह विचार करे की वर्तमान में हमें अब क्या करना है, क्योंकि दुनियां में वास्तविक सम्पति धन नही मन की प्रसन्नता होती है। जौली अंकल तो इस बात को कद्पि मानने को तैयार नही कि डालरों की चकाचौध में अपनें बच्चो के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हुए उनकी खुश्ीयों को कुर्बान किया जाये, फिर चाहे दुल्हा फारेन रिटर्न्ड ही क्यूं न हो?     

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