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Saturday, February 13, 2010

मौज मस्ती में न खो जायें यह अनमोल जीवन

आज दुनियां में हर तरफ चहल पहल और पहले से बहुत अधिक लोग है। चारों और भीड़ ही भीड़ देखने को मिलती है, लेकिन यदि हम गौर करे तो इस भीड़ में बहुत कम ही अच्छे इंसान है। भगवान ने हमारे अच्छे कर्मो के फलस्वरूप ही शायद हमें मनुष्य योनि में भेजा है। हमारी जिंदगी एक सुंदर फूल की तरह है और प्यार-मुहब्बत उसका शहद। अच्छा स्वास्थ्य, अच्छी समझ जीवन के कुछ ऐसे वरदान है जिससे न केवल हम अपना बल्कि दूसरों के जीवन को भी संवार सकते है। हम व्यर्थ में भूत और भविष्यकाल की चिंता में खोये रहते है जबकि कुछ समय पहले तक जो भविष्य था वह अब हो रहा है, जो अब हो रहा है वह अतीत बनता जा रहा है, इसलिए चिंता करने से क्या फायदा?
जीवन में कई बार कुछ समस्याऐं आने पर लोग जल्द ही घबरा जाते है, जिससे उनके दिमाग का संतुलन बिगड़ने का खतरा हो जाता है जबकि थोड़ी सी हिम्मत ही मनुष्य का कठिन परिस्थितियों में साथ देती है। इसीलिये महापुरष कहते है कि मनुष्य की असली परीक्षा विपत्ति पड़ने पर ही होती है, जो धैर्य रखता है वह हर मुसीबत से पार पा जाता है। जो इंसान एक बार दुखों को झेल लेता है वह कमजोर नही बल्कि सुख ग्रहण करने की ताकत पा लेता है। बचपन से एक बात हम सुनते आ रहे है कि भगवान केवल उसी की मदद करता है जो खुद की मदद करता है। यदि आपके एक हाथ में कर्म है तो दूसरे हाथ में सफलता खुद ही आ जाती है। जीवन में कभी कितना ही बड़ा दुख क्यूं न आ जाये, हर दुख दर्द को मिटाने के लिये दुनियां में दो सबसे महान चिकित्सक है - परमात्मा और समय।
यह जानते हुए भी कि मनुष्य हंसकर अपने दुखों को दूर कर सकता है, हम रोकर अपने दुखों को और अधिक बढ़ा लेते है। जब कभी भी कोई कार्य प्रेमभाव के साथ किया जाता है तो उसमें तत्काल सफलता मिलती है। यह सच है कि इस दुनियां में धन के बिना जीना मुशकिल है, लेकिन केवल धन के लिये जीना भी गलत है। जीने के लिये अपनी जरूरत मुताबिक धन कमाना ठीक है, किंतु हर समय धन-दौलत जमा करने की भूख और लालसा रखना बुरी बात है। हम अक्सर अपनी इच्छाशक्ति के विरद्व बार-बार प्रतिज्ञा तो ले लेते है। परंन्तु यदि हम अपनी प्रतिज्ञा के बारे में सावधान नही है, तो प्रतिज्ञा लेकर उसे तोड़ने से अच्छा है कि हम प्रतिज्ञा ही न लें। ऐसा करने से हम सबसे अधिक धोखा अपने आप को ही देते है।
जिस प्रकार कुएं में पत्थर फैंकते ही आवाज दोगुनी होकर लौटती है, ठीक उसी तरह जब कभी भी हम किसी को खुशी देते है तो हमें खुद-ब-खुद खुशी मिल जाती है। दूसरे का भला करते समय सिर्फ यही सोचो की आप इसी के साथ अपना भला भी कर रहे हो। हमें एक बात कभी नही भूलनी चहिये कि दूसरों की जान बचाने से बड़ा परोपकार कोई नही हो सकता। ऐसे कार्य को केवल इंसान ही नही ईश्वर भी देखते है। यदि हम अपने बर्जुगों की थोड़ी बहुत भी सेवा करते है तो उनके प्रेम एवं आशिर्वाद से हमारी आयु, के साथ हमारे यश, विद्या और शक्ति में वृद्वि होती है। भूखों को अन्न देना, अपाहिजों की मदद करने से भी प्रभु बहुत प्रसन्न होते है। परन्तु कुछ लोग थोड़ा बहुत दान करने के बाद उसे बार-बार जताते है, इससे तो यही अच्छा है कि किसी को कुछ न दिया जाए।
भगवान द्वारा दिया हुआ यह अनमोल जीवन जीने और कुछ करने के लिए है। केवल दूसरों को उपदेश देकर वक्त बिताना हमारे जीवन का उद्देश्य नहीं है। अगर हम अपना सारा समय बिना कुछ दान-पुन और भगवान की पूजा के सिर्फ खा और सो कर गुजार देते है तो हमारा यह जीवन व्यर्थ है। असल जीवन में तो अपनी इन्द्रियों पर सम्पूर्ण नियंत्रण ही सच्ची विजय कहलाता है। यदि हम अपना अवगुणों रूपी कचरा भगवान को दे दें तो कोई भी व्यक्ति आप पर कीचड़ नही उछाल पायेगा। ज्ञान प्राप्ति की इच्छा अंतिम क्षण तक नही छोड़नी चाहिए। सच्चा इंसान वही है, जो बुराई का बदला सदैव भलाई से दे।
संसार में ऐसा कोई भी नहीं है जो नीति का जानकार न हो, परन्तु न जाने फिर भी कुछ लोग उसके प्रयोग से विहीन क्यों होते है। सब कुछ जानते हुए भी हम अपने आप को गुनाह करने से क्यों नही रोक पाते? अगर मुहब्बत करनी है तो खुदा से करो, वो कभी भी अपने आशिक को उदास नही करता लेकिन हम दुनियावी रिश्तों के मोहजाल में फंस कर अपना अनमोल जीवन मौज मस्ती में गुजार देते है।
जौली अंकल की राय तो यही कहती है कि प्रतिदिन कुछ न कुछ अच्छा काम करने का संकल्प एक दिन आपको सर्वश्रेष्ठ काम करने की आदत भी डाल देता है। जीवन में सदा हर काम पूरी जान लगाकर करें, अधूरे मन से किया काम आपके श्रेष्ठ बनने का मौका छीन लेता है। निष्ठा, संकल्प और इच्छाशक्ति किसी में भी है तो उसके लिए कुछ भी अंसभव नही है। इन्ही सब बातो से हम अपना अनमोल जीवन मौज मस्ती में खोने से बचा सकते है।     

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