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Saturday, February 13, 2010

पारखी नजर

तेजी से विज्ञान की तरक्की हर इंसान को वास्वतिक जिंदगी की असलियत से दूर करती जा रही है। नतीजतन हम अपने परिवार, और समाज के साथ-साथ भगवान से भी दूर होते जा रहे हैं। जो कोई भगवान के बारे में थोड़ा बहुत ज्ञान या आस्था रखता है, वो खुद को अंहकारवश बहुत बड़ा विद्ववान और दूसरो को मूर्ख समझने लगता है। किसी धर्म के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी या यू कहियें कि आधा-अधूरा ज्ञान रखने वालों का घंमड तो सातवें आसमान पर देखने को मिलता है। वो बाकी समाज के लोगो को हर समय यह जताना नहीं भूलते की वो भगवान के सबसे नज़दीकी और खास है।
क्या आज तक किसी ने भगवान को देखा है? क्या कोई भगवान को देख सकता है? जिस चीज को हम देख नहीं सकते, क्या उसका अस्तित्व कैसे हो सकता हैं? यह कुछ ऐसे प्रश्न है, जिनका जवाब आज तक शाायद किसी को नहीं मिल पाया। भगवान की बात तो छोड़ो, क्या कभी किसी ने फूलो की खुशबू या अपने सिरदर्द को देखा है? हम केवल ऐसी चीजो को महसूस ही कर सकते हैं। अगर हमने यह छोटी-छोटी चीजे नहीं देखी, तो भगवान के अस्तित्व पर प्रश्न उठाने वालों की समझ के बारे में क्या कहें?
एक बार एक मुसद्दी लाल जी अपने बाल कटवाने के लिये नाई की दुकान पर गये। जैसा कि आप सबने अक्सर देखा होगा कि अधिकांश नाई लोग अपना काम करते समय एक पल भी चुप नहीं रह सकते। वो किसी न किसी विषय पर अपनी राय देते ही रहते हैं। फिर चाहे वो गली-मुहल्ले की कोई परेशानी हो या देश की कोई गम्भीर समस्या। मुसद्दी लाल से बात करते-करते मुद्दा भगवान के होने या न होने पर आकर रुक गया। मुसद्दी लाल के लाख समझाने पर भी नाई अपनी बात पर अड़ा रहा कि दुनिया में भगवान नाम की कोई चीज नहीं है।
यदि भगवान सचमुच होता, तो फिर दुनियॉ में हर तरफ यह दुख ही दुख, गरीबी, भुखमरी, कत्ल और लूटपाट क्यो होते? लोग बीमार क्यूं होते? बच्चे अनाथ क्यूं होते? अस्पताल मरीजों से यूं तो न भरे रहते, गरीबी और लाचारी की वजह से लोग आत्महत्या क्यूं करते? आप कहते हो कि भगवान सबको बहुत प्यार करते हैं। तो क्या भगवान को अपने प्रियजनों का तड़पते देख यह सब कुछ अच्छा लगता है? जब मुसद्दी लाल जी की भगवान के आस्तित्व के बारे में सभी दलीलें फेल हो गईं तो वो बुझे मन से अपना काम खत्म होते ही एक समझदार इन्सान की तरह चुपचाप उस नाई को पैसे देकर चल दिय, क्योंकि मुसद्दी लाल जी इस बात को अच्छी तरह से समझते है कि कभी भी किसी मूर्ख से नही उलझना चहिये क्योंकि ऐसे में वहां खड़े सभी देखने वाले को दोनों ही मूर्ख प्रतीत होते है।
जैसे ही मुसद्दी लाल जी उस नाई की दुकान से बाहर आये, तो उन्होंने देखा की उस बस्ती में काफी सारे लोग बहुत ही लबें और गन्दे बालों के साथ इधर-उधर घूम रहे थे। मुसद्दी लाल कुछ पल सोचने के बाद तुरन्त वापिस आ कर उस नाई से बोले कि मुझे लगता है, कि तुम्हारी सारी बस्ती में कोई भी नाई नहीं है। नाई ने हैरान होते हुए कहा, कि यह आप क्या कह रहे हो? अभी तो मैने तुम्हारे बाल काटकर ठीक किये है, और तुम कह रहे हो कि यहां कोई नाई नहीं रहता। मुसद्दी लाल ने अब अपनी बात विस्तार से कहनी शुरू की, जैसे ही मैं तुम्हारी दुकान से बाहर निकला तो मैंने देखा कि तुम्हारी बस्ती के अधिकतर लोग बहुत ही लबें और गन्दे बालों के साथ यहां-वहां घूम रहे हैं। नाई बोला उससे क्या होता है? मैं तो यहां अपना काम कर रहा हूं,। अब जब तक कोई मेरे पास आयेगा ही नहीें तो मैं उसके पीछे-पीछे दौड़ कर तो उनके बाल नही संवार सकता।
अब बात पूरी तरह से मुसद्दी लाल की पकड़ में आ गई। उन्होंने उस नाई को समझाना शुरू किया कि तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो। जैसे यह लोग जब तक तुम्हारे पास नहीं आते, तब तक तुम इनके लिये कुछ नहीं कर सकते, ठीक वैसे ही भगवान तो इसी दुनिया में है, लेकिन जब तक हम लोग उसके करीब नही जायेंगे, तब तक वो हमारे लिये क्या कर सकता है? उसकी मदद और आशीर्वाद के बिना तो हमें हर प्रकार के दुख और तकलीफों का सामना करना ही पड़ेगा।
जिस प्रकार किसी जानवर को मंहगे सोने-चांदी और हीरे-मोतीयों की समझ नही होती, वो उन्हें छोड़ कर भी घास के पीछे ही भागते है। इसका मतलब यह तो नहीं कि हीरे-मोतियो की कोई पहचान या कीमत खत्म हो गई। ठीक उसी तरह भगवान तो हर कण-कण से लेकर छोटे-बड़े जीव में मौजूद है। जौली अंकल की समझ तो यही कहती है कि भगवान को सदा ही हमारे अंग-संग रहता है, परन्तु उसे देखने के लिये केवल एक सच्चे हृदय एवं पारखी नजर की जरूरत होती है।     

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