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Sunday, February 14, 2010

बच के रहना रे बाबा

आज पप्पू का बारहवीं कक्षा का नतीजा आने वाला है, और वो अभी तक घोडे बेच कर सो रहा है। पूरे घर में तनाव का वातावारण है। पप्पू के पिताजी मन ही मन चिंता से मरे जा रहे थे। क्योेंकि इससे पहले भी पप्पू बारहवीं कक्षा में दो बार फेल होकर अपने घरवालों को अच्छे खासे झटके दे चुका है। थोड़ी देर बाद ही कम्पूयटर से नतीजा पता करवाया गया, तो वोही हुआ, जिसकी सारे परिवार को चिन्ता थी। सारे परिवार की मेहनत, मिन्नतें और प्रार्थना भी पप्पू के नतीजे के साथ फेल हो गई थी। पप्पू के पिता बांकें बिहारी के शरीर में से तो जैसे किसी ने जान ही निकाल ली हो।
इतने में सारे मुहल्ले के सब से बड़े हितैषी मुसद्दी लाल जी सैर करते हुए वहां आ पहुंचे। घर में छाये मातम को देख कुछ देर तो चुप रहे। लेकिन ज्यादा देर चुप बैठना उनके बस की बात नहीं है। वो तो किसी का हाल चाल पूछने अस्तपताल गये हों या किसी की मैयत पर, वहां भी कभी चुप बैठे उनको किसी ने नहीं देखा, तो यहां कैसे चुप बैठ सकते हैं? माहौल की गम्भीरता को भांपते हुऐ उन्हाेंने सब परिवार वालों को तसल्ली देनी शुरू की, ज्यादा पढ़ने लिखने से भी कुछ नहीं होता, सरकारी नौकरी तो आजकल किसी को मिलती नहीं, और प्राईवेट कम्पनियों वाले तो दिन रात बच्चों का खून चूसते है। आजकल बहुत से ऐसे काम है जिनमें बिना पढ़ाई के लोग लाखों रूपये कमा रहे हैं। अपनी आदतानुसार मुसद्दी लाल जी बिना मागें ही अपनी सलाह और मषवरे का पिटारा खोल कर बैठ गये।
बांकें बिहारी जोकि पप्पू के नतीजे से बिल्कुल टूट चुके थे, आंख उठा कर मुसद्दी लाल की तरफ ध्यान दिये बिना न रह सके। इससे पहले कि मुसद्दी को जाने के लिये कहते, पप्पू की मम्मी गर्मा-गर्म चाय की प्याली मुसद्दी लाल को थमाते हुऐ बोली भाई साहब हमारे पप्पू के लिये ऐसा क्या काम हो सकता है। जो वो बिना ज्यादा पढ़ाई-लिखाई के कर सकता है। भाभीजी अगर आप दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची देखो तो उनमें से अधिकतर लोग पढ़ाई में फिसड्डी ही रहे हैं।
दुनिया का सबसे अमीर आदमी बिल-गेट जो शायद कुछ कम्पूटयर के साफ्ट्वेयर वगरैह बनाता है, उसे तो बार-बार फेल होने पर स्कूल से निकाला गया था। सचिन, जो आज करोड़ों रूपये का मालिक है, वो अगर पढ़ा लिखा होता तो जरूर किसी दफ्तर में क्लर्क की नौकरी ही कर रहा होता। मुसद्दी लाल जी ने चाय की चुस्कियां लेते हुए अपनी बात जारी रखी। भाभीजी अब आप यह मत कहना, कि आप हमारे देष के राष्ट्र्रपति ज्ञानी जैल सिंह के बारे में कुछ नहीं जानती, वो तो सिर्फ चार जमात तक ही स्कूल गये थे। उससे आगे तो पढाई की रेखा उनके नसीब मे थी ही नहीं। अब इससे ऊंचा पद तो अब हमारे देष में कोई है नहीं, जहां तक हमारे पप्पू ने पहुंचना है।
मुझे समझ नहीं आता आजकल मां-बाप हर समय डंडा लेकर बच्चों के पीछे क्यूं पड़े रहते हैं। आखिर नसीब भी तो कोई चीज है या नहीं? दुनिया के अधिकतर वैज्ञानिकों ने जो भी आविष्कार किए हैं, वो स्कूलों में बैठ कर नहीं पढे। यहां तक की महात्मा बुद्व को भी ज्ञान किसी स्कूल या कालेज में नहीं बल्कि एक पेड़ के नीचे बैठने से प्राप्त हुआ था। यह बात तो सारी दुनिया जानती है। बांकें बिहारी जो मुसद्दी लाल की बिना सिर पैर की बातें सुनकर अन्दर ही अन्दर कुढ़ रहे थे, थोड़ा गुस्से में बोले तुम मेरे पप्पू को बिना पढ़ाई के बिलगेट या किस देश का राष्ट्रपति बना सकते हो। क्या हमारे देश में सारे पढे लिखे लोग बेवकूफ है। सरकार हर साल करोड़ों रूपये खर्च करके नये स्कूल-कालेज किसके लिये बनवाती है। क्या बडे अफसर, डाक्टर, इन्जीनियर बिना पढ़ाई के ही ऊचें पदों पर पहुंच जाते है?
मुसद्दी लाल ने बांकें बिहारी के टेडे तेवरों को समझते हुऐ वहां से खिसकने में ही अपनी भलाई समझी। क्याेंकि उसके पास इन सब बातों को कोई जवाब नहीं था। मुसद्दी लाल जैसे तो अपनी झूठी षान और समय पास करने लिये किसी के भी भविष्य को अंधकार में ढ़केल कर गुमराह कर सकते हैं। फिर उनका जीवन कितना भी दुखमयी और दर्दनाक क्यूं न हो जाए? इससे ऐसे लोगों को क्या फर्क पडता है?
जौली अंकल का तर्जुबा तो यही कहता है कि जीवन में तरक्की के लिये अधिक से अधिक पढ़ाई और कड़ी मेहनत ही सफलता की असली कुंजी है। इसलिये समझदारी इसी में है कि सदा मुसद्दी लाल जैसों से बच के रहना रहना रे बाबा।   

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