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Sunday, February 14, 2010

आंतकवाद के घाव

आंतकवाद के बारे में हम सभी लोग बरसों से न सिर्फ पढ़ते और सुनते आ रहे है, बल्कि इसके दुशप्रभावों के कारण हम सभी ने कभी न कभी अपने प्रियजनों को इसकी बलि चढ़ते भी देखा है। देश के अनगिनत सुरक्षाकर्मी आम आदमी की हिफाजत करते हुए आंतकवदाीयों के हाथो शहीद हो चुके है। आज तक हम में से किसी ने भी किसी बड़े नेता को ऐसे हमलों में मरते नही देखा। कारण साफ है हमारे देश का एक-एक नेता सैंकड़ो सुरक्षाकर्मी अपने साथ लेकर चलता है। उनको सिर्फ अपनी और अपने परिवार वालों की जान की फिक्र तो होती है, लेकिन उस आम आदमी की जिंदगी की कोई परवाह नही होती जो उन्हें गलीयों की धूल से उठा कर देश का बादशाह बना देता है।
कहने को आज हमारा देश दुनियॉ में सबसे बड़ी ताकत बन कर उभर रहा है। अब चाहे बात कारगिल युध्द की हो या हाल ही में हुए मुम्बई हमले की। ऐसी क्या लाचारी है कि हमारा सुरक्षा और खुफियॉ तंत्र हर बार आंतकीओं के हमलों के आगे फेल होता रहा है? एक जनसाधारण भी जरा गौर से देखे तो समझ आता है कि अधिकतर मामलों में यह सब कुछ हमारी सरकार की गलतीयों का ही नतीजा है।
अधिकाश: पार्टीयॉ वैचारिक रूप से पूरी तरह दिवालियॉ हो चुकी है। मुझे कहते हुए शर्म आती है लेकिन हमारे नेताओ का राजनीति में आने का एक मात्र मकसद मुनाफा कमाना ही रह गया है। वो सभी सदा सरकारी स्त्रोतो से अपनी-अपनी पार्टी और अपने परिवार की भलाई करते हुए ही नजर आते है। इस बेशर्मी में कोई भी पार्टी किसी से पीछे नही है। इन लोगो के काम करने के तरीके से तो ऐसा लगता है कि यह सरकार न चला कर कोई प्राईवेट कम्पनी चला रहे हों।
हर बार ऐसे हमलों में हमारे सुरक्षाकर्मी अपनी जान हथेली पर रख कर बहादुरी से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हो जाते है। परन्तु हमारे नेता आपस में लड़ते हुऐ देश की दुर्गाति करते जा रहे है। आंतकवाद से निजाद पाने के लिये अगर अब भी हम अपने नेताओ से किसी प्रकार की आस रखते है, तो यह अपने आप को धोखा देना ही होगा। क्योंकि जिन नेताओ के पास संसद हमले में शहीद हुए सुरक्षाकर्मीयों को श्रध्दाजालि देने के लिये दो मिनट का समय नही है, वो आपकी और हमारी क्या मदद करेगे? अब समय आ गया है कि हम सभी मिल कर आंतकवाद के खिलाफ एक जुटता दिखाते हुए पुलिस और अन्य सुरक्षा एैजेंसीओं के साथ बेहतर तालमेल बिठाने की कोशिश करें। अब राजनीतिज्ञों की जय-जयकार करने की जगह देश पर कुर्बान होने वालो की जय बोलें।
पूरी दुनियॉ में आंतकवाद का जहर फैलाने वाले हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान पिछले कई दशको से बगल में छुरी रखते हुऐ दुनियॉ के सामने दोस्ती का चेहरा दिखा रहा है। उस का काम केवल भारत में नफरत और आंतक फैलाना है। हर कोई जानता है कि जब कभी हमनें उसकी तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया है, उसने सदा ही हमारी पीठ में छुरा घोंपा है। पाकिस्तान के आंतकवादी अब सिर्फ हमारे देश के लिये ही नही पूरी दुनियॉ के लिये खतरा बन चुके है। अमरीका सदा से ही धनबल और शस्त्रो से पाकिस्तान की मदद करता रहा है। आज पाकिस्तान उस को भी आंखे दिखा रहा है। अगर अब भी अमरीका होश में नही आया और पाकिस्तान को इसी प्रकार शह देता रहा तो पाकिस्तान आस्तीन का सांप बन कर बहुत जल्द अमेरिका को भी डस लेगा।
आंतकवादी अक्सर सोचते है कि बेगुनाहो को मौत की नींद सुला कर उन्हें अल्लाह सीधा स्वर्ग में जगह देगा, तो यह उनकी बहुत बड़ी भूल है। जबकि असलियत यह है कि ऐसे मुजरिमों के लिये तो स्वर्ग तो क्या नर्क के दरवाजे भी बंद हो जाते है। आंतकवादी कुछ स्वार्थी लोगो के बहकावे में आकर निर्दोष लोगो के हंसते-खेलते जीवन में दुखो और घावों के पहाड़ खड़े कर देते है।
जौली अंकल ऐसे लोगो को एक बात समझाना चाहते है कि अगर हम किसी को जीवन दे नही सकते तो उसे लेने का हमें कोई हक नही बनता। हमें कभी भी जाने-अनजाने में किसी का दिल नही दुखाना चहिए, क्योंकि हर दिल में ईश्वर का वास होता है।      

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