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Saturday, February 13, 2010

अपने लिये जीये तो क्या जीये.......

आज हम सब बहुत ही नाजुक दौर से गुजर रहे है। एक तरफ जहां हम सब लोग स्वार्थी होते जा रहे है, दूसरी और हमारी सरकार अपनार् कत्तव्य निभाने में पूरी तरह से नाकाम होती जा रही है। अब चाहे मुद्दा मंहगाई, भ्रष्टाचार, गुंडागर्दी, अश्लीलता, बेरोजगारी या जनसंख्या रोकने का हो। मां-बाप अपने बच्चो को काबू करने में असमर्थ, संतान अपने अभिभावको को आत्म सम्मान देने में असमर्थ, लड़कियॉ पूरे कपड़े पहनने में असमर्थ, लड़के शरीफ बनने में असमर्थ, छात्र एवं छात्रऐं शिक्षा का सही उपयोग करने में असमर्थ, एक समय सोने की चिडियॉ कहलाने वाला देश भारत आज जनसाधारण को दो वक्त की दाल रोटी देने में असमर्थ होता जा रहा है।
यदि हम सब असमर्थ है तो समर्थ समाज बनाने के लिए हमें अपने घर से ही पहल करनी होगी क्योंकि कोई भी बाहर से आकर हमारी मदद नही करेगा। सफलता किसी की जागीर नही होती है। सही निर्णय और सही साधन के दम पर कोई भी व्यक्ति संपूर्ण सफलता प्राप्त कर सकता है। जरूरत है तो केवल दृढ़ निश्चय, आत्मविश्वास, पूर्ण समर्पण, एकाग्रता, सही सोच एवं सही लक्ष्य की। प्रकिृत ने मानव को विकसित दिमाग दिया है। इसके सही इस्तेमाल से मनुष्य अपने जीवन में सार्थक बदलाव ला सकता है। अगर मन में निष्ठा और नि:स्वार्थता हो तो लक्ष्य तक पहुंचने में कोई ताकत आपको नही रोक सकती।
किसी भी नजर से देखे तो यह बात स्पष्ट हो जाती है कि पूरी दुनियॉ दो भागो में बंटी हुई है। सुख दुख, अमीर-गरीब, नफा नुकसान, हंसना रोना, रात-दिन आदि। हर इन्सान सदा फूलों जैसी महक के साथ सुखमई जीवन जीने की कामना करता है। उसे कांटों से बहुत डर लगता है। अगर हमें जीवन में फूलो की महक चहिये, तो हमें काटों से भी दोस्ती करना आना जरूरी है। हमें अपनी सोच बदलने के साथ युवाओं और छोटे बच्चो को बचपन से ही सामाजिकर् कत्तव्यों, नैतिकता और धर्मिक संस्कारो के बारे में उन्हे समझाने-सिखाने की जरूरत है।
कोई भी नेक काम करने के लिये किसी दल से या किसी राजनीति पार्टी से जुड़े होना जरूरी नही है। आप अपने घर के सदस्यों या मुहल्ले के चंद दोस्तो के सहयोग से समाज को बदलने का सपना पूरा कर सकते है। आज के समय में ऐसे लोग ही समाज की तस्वीर को बदल सकते है। जरूरत है तो सिर्फ ईमानदारी से पूरी मेहनत और लगन के साथ रचनात्मक काम करने की। कुछ समय के बाद ही आप देखेगे कि आपका नाम नही काम बोलेगा। जैसा की हम सब जानते है कि जब बाग में फूल खिलता है तो उस फूल को किसी से यह कहने नही जाना पड़ता कि मेरे पास सुन्दरता और खुशबू है, उसकी महक ही चारो और यह संदेश पहुंचा देती है, कि बाग में सुन्दर फूल खिले हुऐ है। हो सकता है, कि शुरूआत में आपको कुछ परेशानीयों का सामना करना पड़े लेकिन एक बात हमेशा याद रखो कि पथ्थर पर भी लगातार पानी डालते रहो तो एक दिन उसमें भी सुराख हो जाता है।

जहां तक हो सके, अपने स्वार्थ से ऊपर उठ कर दूसरो के दुख और परेशानीयों के बारे में भी कुछ सोचने का प्रयत्न करे। कुदरत के नियम के मुताबिक आपके ध्दारा दी हुई हर चीज लौट कर वापिस आपके पास ही आती है। उदारण के तौर पर समुंद्र में कुछ भी डालो, कुछ ही देर मे वो सब कुछ वापिस आपके पास ही आ जाता है। आप एक बार किसी को थोड़ी सी खुशी दोगे तो कुदरत के इस नियम के मुताबिक यह दोगुनी होकर आपके पास आयेगी। एक बार यदि आप हिम्मत का पहला कदम आगे बढ़ायेंगे तो परमात्मा की सम्पूर्ण मदद स्वयं ही मिल जायेगी।
जौली अंकल तो हमेशा ही केवल अपने लिये न जी कर दूसरो के प्रति कुछ करने के लिये प्रेरणा देते हुए कहते है कि अपने लिये तो हर कोई जीता है, सबके प्रति भाई-भाई की दृष्टि रखने से ही आप सदा प्रेमयुक्त रह सकेंगे। एक बार किसी और के लिये जी कर देखो, फिर आप महसूस करेगे कि सच्ची खुशी क्या होती है? क्या आप जानते है कि मुस्कुराना ही संतुष्टि की असली निशानी है इसलिए सदा मुस्कराते रहो। यह मुस्कराहट आपको तभी नसीब हो सकती है जब आप सिर्फ अपने लिये न जी कर किसी दूसरे के लिये जीना शुरू करो।        

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