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Wednesday, December 16, 2009

मंहगाई मार गई

एक दिन बंसन्ती अपने पति वीरू को लेकर डॉक्टर के पास इलाज के लिये लेकर गई। उसने बताया कि कई दिन से कुछ भी हज्म नही कर पा रहे। जब कभी भी कुछ खाने को देती  हूँ तो झट से उल्टी कर देते है। डॉक्टर ने कुछ दवांईयों के साथ दिन में 3-4 बार चीनी वाला नीबूं पानी पीने को कहा। थोड़ी ही देर बाद बंसन्ती रोते हुए वापिस आ गई और बोली कि डॉक्टर साहब अब तो इन्हें उल्टीयों के साथ-साथ खुले दस्त भी शुरू हो गये है। डॉक्टर ने सफाई देते हुए कहा कि मैने तो कोई भी ऐसी दवा नही दी जिसके कारण ऐसी कोई दिक्क्त हो पाती। बसंन्ती ने बात साफ करते हुए कहा, कि आपने इन्हें मीठा नीबूं पानी देने को कहा था। रास्ते में हम नींबू और चीनी लेने के लिये रूके। जैसे ही मेरे पति ने नीबूं का 100 रूप्ये और चीनी 40 रूप्ये किलो भाव सुना, तो इन्हें वही खुले दस्त शुरू हो गये। कोई माने न या मानें आज यह हाल सिर्फ वीरू का ही नही हर जनसाधारण्ा का हो रहा है।
देश में कभी सूखे की मार, कभी बाढ़ और कभी पैट्रोल-डीजल की बड़ी हुई कीमतो की आड़ में व्यापारी वर्ग हर वस्तु की बेतहाशा कीमते बढ़ा रहे है। आज पूरा देश मंहगाई की मार झेल रहा है। मंहगाई की मार इतनी घातक होती जा रही है कि आम आदमी फल एवं सब्जी खरीदने के नाम से ही घबराने लगा है। गरीब से गरीब आदमी को भी रोटी खाने के लिए थोड़ी बहुत सब्जी की जरूरत तो होती है, लेकिन लगता है कि आने वाले समय में सूखी रोटी को पानी के साथ ही गले से उतारना पड़ेगा। आईये आम आदमी की नजर से देखे की इस बढ़ती मंहगाई से उसके रोजमर्रा जीवन की क्या हालत हो रही है?
आज मंत्री महोदय जब एक जनसभा को संबोधित करने गए तो वहां सभी लोगो ने उनके गलें में सुंदर फूलमालाओं की जगह मंहगे आलू-प्याज और अन्य हरी सब्जीयों के हार डालकर भव्य स्वागत किया। बिल्कुल ताजा और बढ़िया किस्म की सब्जीयों को देखते ही भीड़ में भगदड़ मच गई, जिससे दो लोगो की मौत हो गई और अन्य कई घायल हो गये। सरकार ने तुंरन्त घोषणा करते हुए किसी भी नेता को मंहगी सब्जीयों के हार डालने पर प्रतिबंध लगा दिया है। कड़ी सुरक्षा होने के बावजूद कई लोग मंत्री जी के गले से सब्जीयां लेकर भागने में कामयाब हो गये।
आज तिलक नगर इलाके में एक मां ने अपने बच्चे को बुरी तरह से मार-मार कर घायल कर दिया, पूछने पर उसने बताया कि यह खाना खाते समय बार-बार तरी के साथ सब्जी की मांग कर रहा था। मेरे पति कोई सरकारी अफसर तो है नही जो ऊपर की मोटी कमाई से इन्हें रोज सब्ज़ी खिला सकूं। एक और खबर के अनुसार आज दिल्ली में शादी के मौके पर दहेज को लेकर उस समय बहुत मारपीट हो गई जब दुल्हे के पिता ने बड़ी कार में तीन साल तक मुफत पैट्रोल और घर में गैस देने की मांग कर डाली। लड़की के पिता ने रोते हुए पत्रकारो को बताया कि मैं गरीब आदमी कार तो दे सकता  हूँ लेकिन पैट्रोल और घर में गैस देना हमारे बस में कहां है।
रिर्जव बैंक ने अपने सभी बैंको को आदेश दिये है कि वो आम जनता को सोने-चांदी और बेशकीमती सामान की तरह मंहगी दालें और सब्ज़ीयो के लिये लाकर की सुविधा प्रदान करे। पुलिस ने भी चेतावनी दी है कि जहां तक हो सके मंहगी दालें और सब्ज़ीयों को अपने घर में न रखे क्योंकि अब इन्हें घर में रखना सुरक्षित नही है। इसी दौरान एन्ंटी करप्शन वालों ने एक सरकारी अफसर के घर छापा मार कर उस समय रंगे हाथो पकड़ लिया जब वो रिश्वत में दो-दो किलो आलू, प्याज और शिमला मिर्च लेकर घर जा रहा था। उसके घर पर मारे गये छापे में और भी कई अन्य सब्ज़ीयां बरामद हुई है। इससे भी बड़ी बात यह सामने आई की उसके घर में खड़ी सभी कारों में पैट्रोल की टैंकी पूरी भरी हुई थी।
देश के सभी प्राईवेट स्कूलों ने ऐसे बच्चो को दखिले में प्राथमिकता देने का फैसला किया है जिन बच्चो के मां-बाप का अपना पैट्रोल पंम्प है, फल एवं सब्जी की थोक दुकान या राशन का होल सैल का कारोबार है। ऐसे लोगो को स्कूल और टीचर्स के लिये यह सभी सामन हर महीने निशुल्क मुहैया करवाना होगा।
सरकारी आंकड़ो की बात करे तो मंहगाई दर अब तक के सबसे निचले स्तर पर आकर खत्म और सस्ताई आ चुकी है। उनके मुताबिक हर चीज के भाव सस्ते हो गये है। क्या सस्ताई के आकड़े देने वाले अफसर आम आदमी को इतना बताने का कष्ट करेगे कि रोजमर्रा की यह सस्ती वस्तुऐं कहा और किस बाजार में मिलती है। ऐसे हालात में यदि कोई मंहगाई के बारे में जौली अंकल की राय जाने भी तो कैसे? क्योंकि वो तो खुद ही रोते रोते यह गाना गा रहे हैं कि मंहगाई मार गई - मंहगाई मार गई।     

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