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Thursday, December 17, 2009

हंसना ज़िंदगी है

बुध्दिमान लोग हमेशा से समझाते आए है, कि प्रतिदिन एक सेब खाने से डॉक्टर के पास जाने की जरूरत नहीं पड़ती। शायद उनके कहने का तात्पर्य यह रहा होगा कि एक सेब खाने से बहुत सी बीमारीयो से छुटकारा मिल जाता है। परन्तु बढ़ती मंहगाई ने सेब को एक आम आदमी की पहुंच से बहुत दूर कर दिया है। कुछ अरसां पहले तक एक जनसाधारण बाजार में घूमते-फिरते कभी-कभार परिवार के लिये सेब खरीद लेता था। लेकिन आज सेब छोटी-छोटी दुकानों से निकल कर बड़े माल्स की शोभा बनते जा रहे है। जहां एक आम आदमी के लिये दो वक्त की दाल-रोटी का जुगाड़ करना ही एक बड़ा मसला बनता जा रहा है वहां ऐसे महौल में आप और हम रोज सेब खाने की बात कैसे सोच सकते है?
प्रकृति का नियम है, कि अगर जिंदगी के किसी मोड़ पर कोई एक रास्ता बंद हो जाये तो वहां से दो और रास्ते खुल जाते है। इसका एक जीता जागता उदारण है, कि आप बहते हुऐ पानी के आगे किसी किस्म की रोक लगा दो तो वो सीधा बहने की बजाए तुरन्त वहां से दायें और बायें दोनो तरफ चलने लगता है। आज अगर सेब हमारी पहुंच से दूर हो गये है, तो भगवान ने हमें तन्दरुस्त जीवन जीने के लिये हास्य का रास्ता भी दिखाया है।
पूरे विश्व के अनेक शोधकत्ताओं ने यह पाया है कि जीवन में हंसी-खुशी न सिर्फ हमें गम्भीर बीमारीयों से बचाती है, ब्लकि हमारी उंम्र में भी 8 से 10 साल तक का इजाफा भी करती है। हास्य ही एक मात्र ऐसा योग है जिससे रोजमर्रा के जीवन में तनाव और मानसिक परेशानी कम होती है, इसी से हमारी उंम्र लंम्बी और जीवन बेहतर बनता है। परिवार और दोस्तो में प्रेम बढ़ता है और हमारे दिलों की दूरियॉ खत्म होती है। जो मातऐ दिल खोलकर हंसती है, उनके बच्चे अधिक तंन्दरुस्त होते है। जो लोग किसी न किसी बीमारी से पीढ़ित है, उनके पास कुछ देर बैठ कर हंसी मजाक या थोड़ी देर हंसने से उनके शरीर में आक्सीजन की मात्रा बढ़ती है, जिससे कि उनके सोचने की शक्त्तिा और आत्मविश्वास बढ़ता है। किसी भी बीमारी का मुकाबला करने के लिये मरीज की इच्छा शक्त्ति का बहुत बड़ा योगदान होता है। दवा-दारू भी तभी असर करती है, जब मनुष्य में जीने की लालसा हो।
जैसे ही किसी भी मरीज को दर्द और तकलीफ से थोड़ी राहत मिलती है, उसको घर वालों और अपने नजदीकी रिश्तेदारों के साथ बातचीत करने के साथ-साथ खाना खाने में भी आंन्नद मिलने लगता है। इन छोटी-छोटी बातो से सारे घर का महौल अपने आप संवरने लगता है। कुछ लोग यह मानते है कि हंसी-खुशी सिर्फ चुटकले सुनने-सुनाने से ही मिलती है, ऐसी बात नही है। यह तो अब आप के ऊपर निर्भर करता है, कि आपको किस तरह के महौल से सकून मिलता है। क्या आपका मन दीन-दुखीयों की सेवा करके या गरीब और अनाथ बच्चो की मदद करने से शांति महसूस करता है। हर आत्मा की भूख एक अलग किस्म के भोजन से मिटती है।
कुछ लोग सवाल करते है, कि क्या हंसने से हमारे शरीर की कोई चोट या जख्म ठीक हो सकता है? क्या हमेशा खुश रहने वालों को कभी मौत नही आती? ऐसे लोगो के लिये मैं एक बात कहना चा हूँगा कि चोट का इलाज तो डॉक्टर महरम पट्टी से ही कर सकते है, लेकिन हास्य उस घाव के दर्द को बहुत हद तक कम कर सकता है। जहां तक मौत का प्रश्न है, तो मैं साधू-संतो की एक बात को दोहराना चा हूँगा, कि इस दुनियॉ में जो कुछ भी पैदा हुआ है, उसको एक न एक दिन नष्ट होना ही है। मौत भी एक अटल सत्य है, आज तक इस दुनियॉ में कोई भी सदा के लिये नही जी सका। जब इस दुनियॉ से जाना ही है, तो क्यूं न हंसते-हंसते जाया जाये। एक बात तो अनेको बार सिद्द हो चुकी है, कि हास्य से बहुत सी बीमारीयॉ और दर्द बिना दवा के ठीक हो जाते है, जिसके लिये हमें कोई कीमत भी अदा नही करनी पड़ती।
जिंदगी और हंसी का गहराई से अध्यन करने पर एक ही बात सामने आती है कि जिंदगी एक फूल है और हंसी उसका शहद। हंसी खुशी बांटने से जीवन में मधुरता आती है। जीवन में मन की खुशी ही सबसे बड़ी जयदाद है और खुशी वह फल है जो हर परिस्थिति में मीठा होता है। थोड़ी सी हंसी पराये लोगो को भी अपना बना देती है। आप जीवन में किसी को खुशी दोगे तो यह सदा दोगुनी होकर आपके लौटती है। मुस्कुराना संतुष्टि की निशानी है इसलिए सदा मुस्कराते रहो। हंसी-मजाक के बिना जीवन में सच्ची खुशी नही मिल सकती। जो दूसरों को खुशी देता है वही सबसे बड़ा दानी कहलाता है। होठों पर मुस्कान हो तो हर मुश्किल काम आसान हो जाता है। दुनियॉ की सबसे बड़ी अमीरी धन नहीं है बल्कि हंसी-खुशी हैे। जो लोग प्रसन्न रहते हैं, उनके मन में कभी आलस्य नहीं आता। जीवन बहुत छोटा है, परंतु हंसने के लिए एक पल ही काफी है। हंसी-खुशी ही मनुष्य का कठिन परिस्थितियों में भी साथ देती है। जिंदगी की खुशियों को दूसरों के साथ बांटना सबसे बड़ी सेवा है। खुश रहने वाले व्यक्ति को आनंद व सुख सहज ही मिल जाता है। जिंदगी में हंसी के इतने बड़े महत्व को समझने के बाद तो अब हमें जौली अंकल की बात माननी ही पड़ेगी कि हंसना ही जिदंगी है।   

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